राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजों में कई बड़े नेताओं को झटका लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में पार्टी को बड़ी जीत नहीं दिला सके। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में भी भाजपा नगर निगम में बोर्ड बनाने की स्थिति में नहीं पहुंच पाई।
गहलोत और शेखावत के वार्ड में हारी पार्टी
जोधपुर नगर निगम चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के वार्ड नंबर 88 से कांग्रेस प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। वहीं केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के वार्ड में भाजपा प्रत्याशी भी जीत नहीं दर्ज कर सका। जोधपुर नगर निगम के 88 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने 44-44 सीटें जीतीं।
भरतपुर में निर्दलीयों का दबदबा
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में भाजपा को बड़ा झटका लगा। भरतपुर नगर निगम के 65 वार्डों में भाजपा को 20 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस सिर्फ 7 वार्ड जीत सकी। यहां निर्दलीय उम्मीदवारों ने सबसे ज्यादा 38 वार्डों में जीत दर्ज की। ऐसे में निगम का बोर्ड बनाने में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम होगी।
झालावाड़ में कांग्रेस ने मारी बाजी
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गृह जिले झालावाड़ में भी भाजपा पिछड़ गई। झालावाड़ नगर परिषद के 45 वार्डों में भाजपा को सिर्फ 13 सीटें मिलीं। कांग्रेस ने 39 वार्डों में जीत दर्ज की। इन नतीजों के बाद यहां कांग्रेस का बोर्ड बनना तय माना जा रहा है।
अजमेर में भाजपा बहुमत से दूर
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के गृह जिले अजमेर में भी भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों में कांग्रेस ने 37 और भाजपा ने 32 सीटें जीतीं। दोनों दल बहुमत के आंकड़े से दूर हैं, इसलिए निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। स्थानीय निकाय चुनाव के ये नतीजे राजस्थान की सियासत में कई संकेत दे रहे हैं। खास तौर पर बड़े नेताओं के प्रभाव वाले इलाकों में पार्टी का कमजोर प्रदर्शन आने वाले समय में चर्चा का विषय बन सकता है।