कांग्रेस नेता राहुल गांधी गुरुवार को मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक स्थित जगला गांव पहुंचे। यहां उन्होंने उन बैगा आदिवासी बच्चों के परिवारों के बीच बैठकर बातचीत की, जिनकी बीमारी के चलते मौत हुई है। राहुल गांधी परिवारों से उनकी समस्याएं और बच्चों के इलाज से जुड़ी जानकारी ले रहे हैं। कार्यक्रम स्थल पर करीब डेढ़ हजार लोगों की मौजूदगी बताई जा रही है। इस दौरान राहुल गांधी से मिलने पहुंचीं विधायक अनुभा मुजरे और विवेक पटेल को पुलिस ने रोक दिया।
प्राथमिक स्कूल में बच्चों से भी मिले
जगला गांव पहुंचने से पहले राहुल गांधी ने माटे प्राथमिक शासकीय स्कूल का दौरा किया। यहां उन्होंने स्कूली बच्चों से करीब 15 मिनट तक मुलाकात की और उनसे बातचीत की। राहुल ने बच्चों से पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल में मिलने वाले मिड डे मील के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने बच्चों से यह जानने की कोशिश की कि उन्हें स्कूल में भोजन किस तरह दिया जाता है और स्कूल की व्यवस्थाएं कैसी हैं।
32 आदिवासी बच्चों की मौत का मामला
बालाघाट जिले में पिछले तीन महीनों के दौरान कुपोषण और मलेरिया से 32 आदिवासी बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। इसी मुद्दे को लेकर राहुल गांधी प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर रहे हैं। इनमें पांच ऐसे बच्चों के परिवार भी शामिल हैं, जिनकी मौत प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने की बात कही जा रही है। मृत बच्चों की संख्या और मौत के कारणों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं, ऐसे में मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं।
दौरे को लेकर बीजेपी का पलटवार
राहुल गांधी के बालाघाट दौरे को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। बीजेपी की ओर से इस दौरे को राजनीतिक माइलेज लेने की कवायद बताया गया है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी प्रभावित आदिवासी परिवारों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को समझने और जमीनी स्थिति जानने पहुंचे हैं। राहुल की परिवारों के साथ मुलाकात के दौरान स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी व्यवस्थाओं को लेकर भी चर्चा होने की बात सामने आई है।
आदिवासी वोट का चुनावी गणित
मध्यप्रदेश की आबादी में आदिवासी समुदाय की हिस्सेदारी 21.1 प्रतिशत बताई जाती है। विधानसभा की 230 सीटों में 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा करीब 37 अन्य विधानसभा सीटों पर भी आदिवासी मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस तरह करीब 84 विधानसभा सीटों पर आदिवासी मतदाताओं का प्रभाव माना जाता है। लोकसभा की 29 सीटों में 6 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। ऐसे में बालाघाट जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों से जुड़ा कोई भी मुद्दा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।