पंजाब में धान की सरकारी खरीद का सीजन शुरू हो गया है। किसानों को मंडियों में फसल बेचने के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए राज्य सरकार ने व्यापक इंतजाम किए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में सरकार ने खरीद प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है।
1,887 मंडियां खरीद के लिए तैयार
धान खरीद के लिए पूरे पंजाब में 1,887 मंडियां अधिसूचित की गई हैं। इन मंडियों में बिजली, साफ पानी, शौचालय, शेड और साफ-सफाई जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त खरीद केंद्र भी शुरू किए जा सकते हैं।
180 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य
सीजन 2026-27 के लिए पंजाब को 180 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य दिया गया है। राज्य सरकार ₹2,461 प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद करेगी। यह दर ग्रेड-ए धान के लिए निर्धारित MSP है, जबकि सामान्य धान का MSP ₹2,441 प्रति क्विंटल बताया गया है।
₹42,786.68 करोड़ की CCL मिली
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने खरीद तैयारियों का जायजा लेते हुए बताया कि अक्टूबर की खरीद के लिए पंजाब को ₹42,786.68 करोड़ की कैश क्रेडिट लिमिट (CCL) मिल चुकी है। सरकार के मुताबिक इससे किसानों को खरीदे गए धान का समय पर भुगतान करने में मदद मिलेगी।
मंडियों में बारदाने और जरूरी सुविधाओं का इंतजाम
सरकार के मुताबिक मंडियों में धान की पैकिंग के लिए पर्याप्त बारदाना पहुंचाया गया है। किसानों और मजदूरों के लिए पेयजल, बिजली, सफाई और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों को मंडियों में खरीद और उठान की प्रक्रिया की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
24 घंटे में भुगतान का दावा
मंत्री लाल चंद कटारूचक्क के मुताबिक किसानों को खरीदे गए धान का भुगतान 24 घंटे के भीतर सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है। सरकार ने खरीद और उठान की प्रक्रिया को साथ-साथ चलाने की बात कही है, ताकि मंडियों में फसल जमा होने की स्थिति न बने।
किसानों से सूखा धान मंडी में लाने की अपील
खरीद प्रक्रिया में देरी से बचने के लिए किसानों से धान को अच्छी तरह सुखाकर मंडियों में लाने की अपील की गई है। अधिकारियों के मुताबिक खरीद के लिए धान में नमी की निर्धारित सीमा का पालन करना जरूरी है। राज्य सरकार का कहना है कि खरीद प्रक्रिया के दौरान किसानों, आढ़तियों और मजदूरों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन और संबंधित विभागों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।