पंजाब में आम आदमी क्लीनिकों में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों ने नौकरी की सुरक्षा और वेतन बढ़ोतरी समेत अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के हालिया बयान के बाद कर्मचारियों की चिंता और बढ़ गई है। मुख्यमंत्री ने आशंका जताई थी कि यदि सरकार दोबारा सत्ता में नहीं आती है तो आम आदमी क्लीनिक बंद हो सकते हैं। इस बयान के बाद आम आदमी क्लीनिक साझा फ्रंट ने अपने आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया है।
फ्रंट के प्रतिनिधियों परमजीत सिंह और डॉ. परमिंदर पाल के मुताबिक, राज्य में करीब 10 मोहल्ला क्लीनिकों के माध्यम से 44 डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती की गई थी। कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले करीब चार वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इस अवधि में उनके वेतन में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की गई।
नौकरी की सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चिंता
कर्मचारियों के मुताबिक, मौजूदा समय में उनकी सबसे बड़ी चिंता नौकरी की सुरक्षा को लेकर है। फ्रंट का कहना है कि यदि सरकार बदलने के बाद आम आदमी क्लीनिकों की व्यवस्था प्रभावित होती है या इन्हें बंद किया जाता है, तो बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मी बेरोजगार हो सकते हैं।
इसी आशंका के मद्देनजर कर्मचारियों ने सरकार से मांग की है कि उन्हें कॉन्ट्रैक्ट पर नियमित रूप से नियुक्त किया जाए और उनकी नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। फ्रंट का कहना है कि लंबे समय से सेवाएं देने वाले कर्मचारियों के भविष्य को लेकर सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।

कई बार आंदोलन, फिर भी नहीं निकला समाधान
फ्रंट के प्रतिनिधियों ने दावा किया कि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर पहले भी कई बार आंदोलन कर चुके हैं। हालांकि, उनके मुताबिक अब तक सरकार की ओर से ऐसा कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है, जिससे उनकी समस्याओं का स्थायी रूप से समाधान हो सके।
फ्रंट ने अब सरकार को आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। प्रतिनिधियों के अनुसार, यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई फैसला नहीं लिया गया तो 12 अक्टूबर को संगरूर में मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास का घेराव किया जाएगा।
फ्रंट ने कहा है कि आंदोलन को आगे किस तरह विस्तार दिया जाएगा, इसकी रूपरेखा भी जल्द तय की जाएगी। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी नौकरी की सुरक्षा और लंबित मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे।