नई दिल्ली, 2 अक्टूबर 2026: छुट्टियों का मतलब हमेशा नई जगहों की सैर करना, लगातार घूमना और दिनभर अलग-अलग गतिविधियों में व्यस्त रहना नहीं होता। जेन Z के बीच अब एक अलग तरह का यात्रा चलन चर्चा में है, जिसे ‘रूम रॉटिंग’ कहा जा रहा है। इस चलन में लोग छुट्टियों के दौरान होटल के कमरे में ही आराम करने, सोने और बिना किसी तय कार्यक्रम के समय बिताने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
आखिर क्या है ‘रूम रॉटिंग’?
‘रूम रॉटिंग’ का मतलब छुट्टी के दौरान जानबूझकर होटल के कमरे में ज्यादा समय बिताना है। इसमें लोग व्यस्त यात्रा कार्यक्रम से दूरी बनाते हैं और आराम, खाली समय तथा बिना योजना के समय बिताने को छुट्टी का हिस्सा मानते हैं।
एक आरामदायक बिस्तर, होटल का अच्छा नजारा और पूरा दिन बिना किसी योजना के बिताना इस चलन की खासियत बन रहा है। यानी छुट्टी के हर घंटे को घूमने या गतिविधियों से भरने के बजाय लोग कुछ समय पूरी तरह आराम के लिए रखना पसंद कर रहे हैं।
घूमने के बजाय आराम पर जोर
परंपरागत रूप से यात्रा को ज्यादा से ज्यादा जगहें देखने और अलग-अलग गतिविधियां करने से जोड़ा जाता रहा है। ‘रूम रॉटिंग’ इस सोच से अलग है। इसमें यात्री होटल के कमरे को ही अपनी छुट्टी के अनुभव का हिस्सा बना रहे हैं।
इस दौरान आराम करना, सोना, फिल्म या धारावाहिक देखना, होटल से खाना मंगाना, किताब पढ़ना या बस शांत माहौल में समय बिताना शामिल हो सकता है।
जेन Z में क्यों बढ़ रहा है यह चलन?
‘रूम रॉटिंग’ को लेकर सामने आ रही रिपोर्टों के अनुसार, युवा यात्री छुट्टियों को केवल घूमने का मौका नहीं, बल्कि खुद को तरोताजा करने और मानसिक रूप से आराम देने के अवसर के रूप में भी देख रहे हैं। लगातार व्यस्त रहने और हर समय कुछ न कुछ करने की अपेक्षा के बीच यह चलन धीमी और कम दबाव वाली यात्रा की ओर बदलाव को दिखाता है।
यानी अगली बार कोई छुट्टी के दौरान पूरा दिन होटल के कमरे में बिताए, तो जरूरी नहीं कि वह अपनी यात्रा का समय बर्बाद कर रहा हो। हो सकता है, उसके लिए बिना किसी भागदौड़ के आराम करना ही असली छुट्टी हो।