पहाड़ों की रानी मसूरी में पर्यटन सीजन के दौरान बैरियरों पर लगने वाले लंबे जाम से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। नगर पालिका परिषद ने मसूरी-देहरादून मार्ग स्थित कोल्हूखेत इको बैरियर और माल रोड प्रवेश बैरियर पर फास्टटैग आधारित शुल्क प्रणाली लागू करने की तैयारी तेज कर दी है। इस संबंध में नगर पालिका सभागार में सभी स्टेकहोल्डर्स और संबंधित कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
ट्रैफिक जाम से राहत
नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने बताया कि वर्तमान में इको शुल्क और माल रोड प्रवेश शुल्क मैन्युअल तरीके से लिए जाने के कारण पर्यटक सीजन में वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। नई प्रणाली लागू होने से वाहनों की आवाजाही तेज होगी और जाम की समस्या में काफी कमी आएगी। मीरा सकलानी ने कहा कि नगर पालिका का प्रयास है कि अगले तीन महीने के भीतर नई व्यवस्था को धरातल पर उतार दिया जाए। इसके लिए तकनीकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और संबंधित कंपनी के साथ कार्ययोजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा, हम ऐसी व्यवस्था बना रहे हैं जो पर्यटकों के लिए सुविधाजनक होने के साथ पूरी तरह पारदर्शी भी होगी। बैरियरों पर अनावश्यक देरी खत्म होगी और ट्रैफिक जाम से भी राहत मिलेगी।
नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी
इको बैरियर पर तीन अलग-अलग लेन
पालिका अध्यक्ष ने बताया कि कोल्हूखेत इको बैरियर पर तीन अलग-अलग लेन बनाई जाएंगी। पहली लेन फास्टटैग से गुजरने वाले वाहनों के लिए होगी, दूसरी स्थानीय निवासियों के लिए और तीसरी दोपहिया वाहनों के लिए, जहां फिलहाल शुल्क मैन्युअल तरीके से लिया जाएगा। माल रोड प्रवेश बैरियर पर भी इसी प्रकार की डिजिटल व्यवस्था लागू की जाएगी ताकि प्रवेश प्रक्रिया तेज और व्यवस्थित हो सके।
नई व्यवस्था में विशेष सुविधा
मीरा सकलानी ने बताया कि मसूरी के स्थायी निवासियों को नई व्यवस्था में विशेष सुविधा दी जाएगी। इसके लिए स्थानीय लोगों को अपनी गाड़ियों का नगर पालिका में पंजीकरण कराना होगा। सत्यापन के बाद उन्हें विशेष पास जारी किए जाएंगे। इस पास के लिए नाममात्र का शुल्क निर्धारित किया जाएगा, जिसका अंतिम निर्णय नगर पालिका बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय लोगों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
शुल्क संग्रह को लेकर सवाल
पालिका अध्यक्ष ने कहा कि अक्सर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से बैरियरों पर होने वाले शुल्क संग्रह को लेकर सवाल उठते रहे हैं। व्यवस्था लागू होने के बाद इको शुल्क से होने वाली आय का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल होगा और उसे सार्वजनिक भी किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना समाप्त होगी। उन्होंने कहा, नई व्यवस्था में लेन-देन पूरी तरह डिजिटल होगा। इससे भ्रष्टाचार और राजस्व में गड़बड़ी की आशंकाओं पर भी अंकुश लगेगा।
सुनील सोनकर की रिपोर्ट