मुरादाबाद। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के बफर जोन से सटी मुरादाबाद की सीमा में तेंदुओं की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है, लेकिन पिछले 22 दिनों से हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। तेंदुओं के लगातार हमलों ने उत्तराखंड से सटे मुरादाबाद के करीब 50 गांवों के लगभग 1 लाख लोगों को डर के साये में जीने को मजबूर कर दिया है।
पिछले 22 दिनों में तेंदुओं के हमले में 3 महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि 20 से ज्यादा किसान घायल बताए जा रहे हैं। लगातार हो रहे हमलों के कारण ग्रामीण खेतों में जाने से डर रहे हैं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी परिवार चिंतित हैं।
खेतों में जाने से डर रहे ग्रामीण
तेंदुओं के खौफ का असर गांवों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ नजर आ रहा है। खेतों में काम करने वाले किसान अकेले बाहर निकलने से बच रहे हैं। कई परिवारों ने डर के चलते बच्चों को स्कूल भेजना तक बंद कर दिया है। ग्रामीण इलाकों में मंदिरों और मस्जिदों से लगातार एनाउंसमेंट कर लोगों को सावधान किया जा रहा है। किसानों से अपील की जा रही है कि वे फिलहाल खेतों में जाने से बचें और समूह में ही बाहर निकलें। जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित इन गांवों में शाम होते ही सन्नाटा पसरने लगता है। ग्रामीणों के बीच सबसे ज्यादा डर इस बात का है कि तेंदुआ कब और कहां से हमला कर दे, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।
22 दिन में 3 महिलाओं की मौत
पिछले 22 दिनों में तेंदुओं के हमलों में तीन महिलाओं की जान जा चुकी है। इसके अलावा खेतों और ग्रामीण इलाकों में काम कर रहे 20 से अधिक किसानों पर भी हमला हुआ है। लगातार हो रही घटनाओं ने ग्रामीणों में ऐसा डर पैदा कर दिया है कि लोग जरूरी काम के लिए भी घर से बाहर निकलने से पहले कई बार सोच रहे हैं।
इलाके में 100 से ज्यादा तेंदुओं का अनुमान
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, जिले में 100 से ज्यादा तेंदुओं की मौजूदगी का अनुमान है। बड़ी संख्या में तेंदुओं की मौजूदगी और जंगल से सटे ग्रामीण इलाकों में उनकी आवाजाही ने चुनौती और बढ़ा दी है। तेंदुओं को पकड़ने और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग ने अभियान तेज कर दिया है।
50 एक्सपर्ट्स कर रहे निगरानी
वन विभाग के करीब 50 विशेषज्ञ और अधिकारी प्रभावित इलाकों में कैंप कर रहे हैं। टीमों द्वारा लगातार गश्त की जा रही है और तेंदुओं की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इलाके में अलग-अलग स्थानों पर 29 पिंजरे लगाए गए हैं। वन विभाग के अभियान के दौरान अब तक 11 तेंदुओं को पकड़ा जा चुका है।
थर्मल ड्रोन से तेंदुओं की तलाश
तेंदुओं को ट्रैक करने के लिए वन विभाग आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल कर रहा है। इलाके में थर्मल ड्रोन की मदद से तेंदुओं की मौजूदगी का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। रात के समय थर्मल कैमरों से तेंदुओं की गतिविधियों को ट्रैक करने की कोशिश की जा रही है, ताकि उनके संभावित ठिकानों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित तरीके से पकड़ा जा सके।
ग्रामीणों की चिंता- ‘खेत में जाएं तो जाएं कैसे?’
ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी परेशानी खेती-किसानी को लेकर है। खेतों में काम किए बिना उनकी रोजी-रोटी प्रभावित होती है, लेकिन खेतों में जाना जान जोखिम में डालने जैसा महसूस हो रहा है। कई ग्रामीणों का कहना है कि पहले तेंदुए कभी-कभार दिखाई देते थे, लेकिन लगातार हमलों ने पूरे इलाके का माहौल बदल दिया है। अब लोग खेतों की तरफ जाने से पहले आसपास का इलाका देखते हैं और कोशिश करते हैं कि अकेले न जाएं।
बच्चों की सुरक्षा भी बनी चिंता
तेंदुओं के खौफ का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं है। गांवों में रहने वाले माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं। कई परिवारों ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग तेंदुओं को जल्द से जल्द पकड़े और प्रभावित गांवों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाए, ताकि लोग सामान्य जिंदगी जी सकें।
फिलहाल जारी है रेस्क्यू और ट्रैकिंग अभियान
मुरादाबाद के जंगल से सटे इलाकों में वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। पिंजरों, गश्ती टीमों और थर्मल ड्रोन के जरिए तेंदुओं को पकड़ने की कोशिश जारी है। हालांकि अब तक 11 तेंदुओं को पकड़ा जा चुका है, लेकिन 22 दिनों में 3 मौत और 20 से ज्यादा हमलों के बाद ग्रामीणों का डर कम नहीं हुआ है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक करीब 50 गांवों के लोग तेंदुओं के खौफ में अपनी जिंदगी गुजारते रहेंगे।