मध्यप्रदेश में वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन आज 30वें दिन पहुंच गया है। यानी डीपीआई के सामने चल रहे संघर्ष को एक महीना पूरा हो गया। अभ्यर्थी लगातार भर्ती में पद बढ़ाने और दूसरी काउंसलिंग शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
नरेंद्र राजपूत का निर्जल अनशन 9वें दिन
राजगढ़ के ब्यावरा निवासी नरेंद्र राजपूत का निर्जल अनशन भी 9वें दिन में प्रवेश कर गया है। आंदोलनकारियों का दावा है कि लगातार पानी नहीं पीने के कारण नरेंद्र की तबीयत बिगड़ रही है और वे बार-बार बेहोश हो रहे हैं। अभ्यर्थी उन्हें अनशन खत्म करने के लिए समझाने का प्रयास कर रहे हैं।
अनशन खत्म करने को तैयार नहीं नरेंद्र
आंदोलनकारियों के मुताबिक, नरेंद्र राजपूत अपनी मांग पर अड़े हुए हैं और अनशन तोड़ने को तैयार नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी हालत गंभीर होती जा रही है और किसी भी समय स्थिति बिगड़ सकती है। आंदोलनकारी उन्हें समझाने के बावजूद उनके फैसले को बदल नहीं पा रहे हैं।
नरेंद्र ने पहले ही जिम्मेदारी तय करने की बात कही
अभ्यर्थियों के अनुसार, नरेंद्र राजपूत पहले ही कह चुके हैं कि यदि उनके साथ कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए डीपीआई आयुक्त अभिषेक सिंह, स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जिम्मेदार होंगे। यह बात आंदोलनकारियों की ओर से कही गई है।
बारिश में भी रात तक जारी रहा धरना
आंदोलनकारियों ने बताया कि गुरुवार-शुक्रवार की रात करीब 1:30 बजे तक डीपीआई के सामने संघर्ष जारी रहा। लगातार बारिश के कारण धरना स्थल पर अभ्यर्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि बारिश के बीच सोना मुश्किल हो गया है और नींद भी पूरी नहीं हो पा रही।
10 हजार और 25 हजार पद बढ़ाने की मांग
अभ्यर्थियों की मुख्य मांग वर्ग-2 में कम से कम 10 हजार और वर्ग-3 में 25 हजार पद बढ़ाने की है। इसके साथ ही वे दूसरी काउंसलिंग शुरू करने की मांग कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि सीमित पदों के कारण परीक्षा में सफल कई उम्मीदवार चयन से बाहर रह गए हैं।
एक महीने बाद भी आंदोलन जारी
अभ्यर्थियों का कहना है कि एक महीने से आंदोलन चलने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं हुई है। 30 दिन के आंदोलन के बीच नरेंद्र राजपूत का 9 दिन का निर्जल अनशन अब प्रदर्शन का सबसे गंभीर पक्ष बन गया है। आंदोलनकारी सरकार से जल्द पहल की मांग कर रहे हैं।