मध्यप्रदेश में अब तक औसतन 33.2 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य कोटे का 89.3% है। मानसूनी सीजन खत्म होने में करीब 11 दिन बाकी हैं। मौसम विभाग के मुताबिक आखिरी सप्ताह में कुछ जिलों में तेज बारिश हो सकती है, जिससे प्रदेश का बारिश कोटा पूरा होने की संभावना है।
37 जिलों में सामान्य से कम बारिश
इंदौर, धार, आलीराजपुर, रायसेन, विदिशा, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, पांढुर्णा, सागर, उज्जैन, रतलाम और शाजापुर समेत कई जिलों में सामान्य बारिश का 80% पानी भी नहीं गिरा है। इन क्षेत्रों में सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए अगले दिनों में अच्छी बारिश जरूरी होगी।
मऊगंज और निवाड़ी में दोगुने से ज्यादा पानी
दूसरी ओर मऊगंज और निवाड़ी में सामान्य कोटे के मुकाबले दोगुने से ज्यादा बारिश हो चुकी है। भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, शहडोल और उमरिया में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।
22 सितंबर तक हल्की बारिश के आसार
मौसम विभाग ने 22 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है। पश्चिमी हिस्से में सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण के कारण कई जिलों में बारिश हो रही है। 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है।
जून में कमी, जुलाई-अगस्त ने संभाला मानसून
इस मानसून सीजन में जून में सामान्य से 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश के कारण स्थिति में सुधार आया। हालांकि जून की कमी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी। प्रदेश में सामान्य बारिश 37.3 इंच मानी जाती है और अब तक करीब 7% कमी बनी हुई है।
भोपाल में लगातार ज्यादा बारिश का ट्रेंड
भोपाल में सितंबर की औसत बारिश करीब 7 इंच है। पिछले कुछ वर्षों से सितंबर में सामान्य से ज्यादा पानी गिर रहा है। शहर में 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 2 सितंबर 1947 का है। सितंबर में आमतौर पर 8 से 10 दिन बारिश होती है।
इंदौर और ग्वालियर में भी बारिश के रिकॉर्ड
इंदौर में सितंबर की मासिक बारिश का रिकॉर्ड करीब 30 इंच है, जो 1954 में दर्ज हुआ था। ग्वालियर में सितंबर 1990 में 647 मिमी यानी करीब 25.5 इंच बारिश हुई थी। वहीं 7 सितंबर 1988 को 24 घंटे में करीब 12.5 इंच बारिश दर्ज हुई थी। इस बार ग्वालियर में अगस्त में ही बारिश का कोटा पूरा हो चुका है।