मध्यप्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने और उनके कौशल को निखारने पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को भोपाल के संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में आयोजित ओरिएंटेशन प्रोग्राम को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले समय में संस्थान हर साल 10 हजार युवाओं को प्रशिक्षण देगा। फिलहाल यहां प्रतिवर्ष करीब 2 हजार युवाओं को विभिन्न कौशल पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण और प्रमाण-पत्र दिया जा रहा है, जबकि वर्ष 2026 में करीब 3 हजार युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में युवाओं के लिए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। मौजूदा दौर में केवल डिग्री ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उद्योगों की जरूरत के अनुरूप कौशल हासिल करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि प्रधान राज्य है, लेकिन अब युवाओं को अपनी क्षमता और तकनीकी दक्षता के बल पर आगे बढ़ना होगा।
संत रविदास के जीवन से कौशल पर भरोसे की सीख
CM डॉ. यादव आगे बोले कि संत शिरोमणि रविदास की 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर उनके जीवन और विचारों से प्रेरणा लेने की जरूरत है। संत रविदास ने कर्म के प्रति निष्ठा, सामाजिक सुधार और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। उनके जीवन से यह सीख मिलती है कि व्यक्ति को अपने कौशल पर भरोसा रखते हुए उसे लगातार निखारना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने ग्लोबल स्किल्स पार्क के 98.9 प्रतिशत प्लेसमेंट को बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यहां विश्वस्तरीय और बहुभाषीय प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को बदलती तकनीक के अनुरूप तैयार कर रहे हैं। कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि काम के प्रति लगन और उसे बेहतर तरीके से करने की क्षमता ही व्यक्ति को आगे ले जाती है।
युवाओं से संवाद, शिल्पकारों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण ले रहे युवाओं से उनके ट्रेड, अनुभव और भविष्य की योजनाओं पर बातचीत की। उन्होंने इंजन लैब, ऑटोट्रॉनिक्स लैब और अन्य अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का निरीक्षण किया। 550 नवप्रवेशित विद्यार्थियों के अभिमुखीकरण कार्यक्रम में उन्होंने युवाओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि उनका कौशल ही उनकी पहचान बनेगा।
मुख्यमंत्री ने माटी शिल्पकार मदन प्रजापति, काष्ठ शिल्पकार संजय अहिरवार, क्रिस्टल शिल्पकार अतुल गुप्ता, मार्बल शिल्पकार पूजा झारिया और बैतूल के धातु शिल्पकार को शॉल-श्रीफल देकर सम्मानित किया। उन्होंने शिल्पकारों की प्रतिभा को देश-दुनिया तक पहुंचाने के प्रयासों की सराहना की।
उद्योगों की जरूरत के मुताबिक तैयार हो रहे युवा
कार्यक्रम में उद्योग प्रतिनिधियों ने ग्लोबल स्किल्स पार्क की आधुनिक अधोसंरचना और उद्योग आधारित प्रशिक्षण की सराहना की। उन्होंने बताया कि यहां से प्रशिक्षित युवा उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार होकर निकल रहे हैं। कई कंपनियों ने भविष्य में भी यहां से प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार देने और अपने कर्मचारियों को उन्नत प्रशिक्षण के लिए भेजने की इच्छा जताई।
कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने कहा कि वर्ष 2025 में संस्थान ने करीब 2 हजार प्रशिक्षुओं को प्रमाणन दिया, जबकि 2026 में यह संख्या करीब 3 हजार तक पहुंचने की उम्मीद है। आने वाले समय में प्रशिक्षण क्षमता को बढ़ाकर पहले 6 हजार और फिर 10 हजार प्रशिक्षुओं प्रतिवर्ष तक ले जाने का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार आसपास की ITI में भी युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि उद्योगों को पर्याप्त संख्या में कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराया जाए, ताकि प्रशिक्षण से रोजगार तक युवाओं का सफर आसान हो सके।