मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले में खरीफ सीजन के दौरान ई-टोकन व्यवस्था बंद होते ही खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सोमवार सुबह से ही जिले के विभिन्न गांवों से सैकड़ों किसान खाद लेने के लिए केंद्रों पर पहुंच गए। खेती के महत्वपूर्ण समय में खाद की जरूरत बढ़ने के कारण किसानों में जल्द से जल्द उर्वरक लेने की होड़ दिखाई दी। केंद्रों पर लंबी कतारें लग गईं और पूरे दिन अफरा-तफरी जैसी स्थिति बनी रही।
बारिश में भी घंटों इंतजार, फिर भी नहीं मिली खाद
सोमवार को जिले में लगातार हो रही भारी बारिश भी किसानों का हौसला नहीं तोड़ सकी। किसान खुले आसमान के नीचे भीगते हुए घंटों तक अपनी बारी का इंतजार करते रहे। हालांकि लंबे इंतजार के बावजूद कई किसानों को खाद नहीं मिल सकी और उन्हें मायूस होकर खाली हाथ लौटना पड़ा। पर्याप्त व्यवस्था और स्पष्ट जानकारी के अभाव में किसानों की परेशानी और बढ़ गई। कई किसानों ने आरोप लगाया कि वितरण प्रक्रिया सुचारु नहीं होने से अनावश्यक अव्यवस्था पैदा हुई।
समय पर खाद नहीं मिलने से फसल पर संकट
किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन में फसलों की बढ़वार के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण समय है और इसी अवधि में खाद डालना बेहद जरूरी होता है। यदि समय पर उर्वरक नहीं मिला तो फसल की वृद्धि प्रभावित होगी, जिससे उत्पादन में कमी आ सकती है। किसानों ने चिंता जताई कि देरी होने पर उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनका कहना है कि खेती पूरी तरह मौसम और समय पर उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करती है, ऐसे में खाद की कमी गंभीर समस्या बन सकती है।
व्यवस्थाओं की कमी से बढ़ी परेशानी
खाद वितरण केंद्रों पर किसानों के लिए न तो पर्याप्त छाया की व्यवस्था थी और न ही बारिश से बचने के इंतजाम किए गए थे। कई किसान छोटे बच्चों और परिवार के सदस्यों के साथ घंटों लाइन में खड़े रहे। इसके बावजूद उन्हें यह भरोसा नहीं मिल सका कि सभी किसानों को खाद उपलब्ध कराई जाएगी। अव्यवस्थित वितरण और सूचना के अभाव ने किसानों की नाराजगी को और बढ़ा दिया।
प्रशासन से पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मांग
किसानों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि जिले में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए और वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाया जाए। उनका कहना है कि यदि समय पर उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई तो खरीफ फसलों का उत्पादन प्रभावित होगा और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। किसानों ने प्रशासन से जल्द समाधान निकालने और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू करने की अपील की है।