एक डॉक्टर, दो जिले और डबल सैलरी! रिश्वत कांड के बाद खुली मप्र स्वास्थ्य विभाग की बड़ी पोल

भ्रष्टाचार में डॉक्टर गिरफ्तार

एक डॉक्टर, दो जिले और डबल सैलरी! रिश्वत कांड के बाद खुली मप्र स्वास्थ्य विभाग की बड़ी पोल

मध्य प्रदेश के डॉ. महेश चंद शर्मा को भ्रष्टाचार और दोहरी पदस्थापना के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग में बड़ी हलचल मचाई है।

एक डॉक्टर दो जिले और डबल सैलरी रिश्वत कांड के बाद खुली मप्र स्वास्थ्य विभाग की बड़ी पोल

एक डॉक्टर, दो जिले और डबल सैलरी! रिश्वत कांड के बाद खुली मप्र स्वास्थ्य विभाग की बड़ी पोल | None

मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का एक ऐसा मामला बुधवार को सामने आया है, जिसने विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रीवा लोकायुक्त की टीम द्वारा कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किए गए शहडोल के संविदा चिकित्सक डॉ. महेश चंद शर्मा के खिलाफ जांच में अब नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।

प्रारंभिक जांच में आरोप सामने आया है कि डॉ. शर्मा एक ओर शहडोल में सेवाएं दे रहे थे, जबकि दूसरी ओर श्योपुर जिले में भी संविदा चिकित्सक के रूप में दर्ज थे और वहां से वर्षों तक वेतन प्राप्त करते रहे। मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।

रीवा लोकायुक्त कार्यालय

रिश्वत प्रकरण के बाद खुली दोहरी पदस्थापना की परत

डॉ. महेश चंद शर्मा उस समय सुर्खियों में आए, जब रीवा लोकायुक्त की टीम ने उन्हें कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। इसके बाद उनके सेवा रिकॉर्ड और पदस्थापना से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू हुई, जिसमें कई अहम तथ्य सामने आए।

जांच में पता चला कि डॉक्टर लंबे समय से एक से अधिक स्थानों पर संविदा पदों से जुड़े रहे। यही नहीं, उनका नाम अन्य जिलों से भी जुड़ा होने की बात सामने आ रही है, जिसकी भी जांच की जा रही है।

शहडोल में सेवा, श्योपुर से मिलता रहा वेतन

जानकारी के अनुसार, डॉ. शर्मा शहडोल जिले में स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थे, जबकि श्योपुर जिले के विजयपुर क्षेत्र स्थित सेहसराम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी संविदा चिकित्सक के रूप में दर्ज थे।

आरोप है कि वर्ष 2021 से श्योपुर स्वास्थ्य विभाग की ओर से उन्हें नियमित रूप से वेतन जारी किया जाता रहा। इससे यह सवाल उठ रहे हैं कि जब चिकित्सक दूसरे जिले में कार्यरत थे, तब उनकी उपस्थिति और सेवाओं का सत्यापन किस आधार पर किया गया।

निगरानी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस मामले ने श्योपुर स्वास्थ्य विभाग की मॉनिटरिंग प्रणाली को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। स्वास्थ्य केंद्रों की निगरानी और कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर थी, वे वर्षों तक इस कथित अनियमितता का पता नहीं लगा सके।

स्थानीय स्तर पर इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला है या इसके पीछे किसी प्रकार की मिलीभगत भी रही है।

राष्ट्रपति के कुनो दौरे में भी लगी थी ड्यूटी

मामले का एक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि डॉ. महेश चंद शर्मा की ड्यूटी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कुनो नेशनल पार्क दौरे के दौरान भी लगाई गई थी। इसके बावजूद उनकी वास्तविक तैनाती और उपस्थिति का प्रभावी सत्यापन नहीं किया गया, जिससे प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर और सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित

मामले के सामने आने के बाद श्योपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. दिलीप सिकरवार ने जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया है।

 CMHO डॉ दिलीप सिकरवार

उन्होंने बताया कि समिति पूरे मामले की जांच करेगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही डॉ. महेश चंद शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और कथित रूप से प्राप्त वेतन की रिकवरी की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप

रिश्वत प्रकरण और कथित दोहरी पदस्थापना का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप की स्थिति है। अधिकारी सेवा अभिलेखों और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच में जुट गए हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल एक डॉक्टर तक सीमित न रहकर विभागीय जवाबदेही और प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।

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