मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 25 जून को सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन के आवागमन के लिए सभी शासकीय भवनों को बाधारहित बनाना आवश्यक है। बच्चों में दिव्यांगता के बारे में संवेदनशीलता विकसित करने के लिए स्कूली पाठ्यक्रम में आवश्यक सामग्री शामिल की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नशामुक्ति के लिए चलाए जा रहे अभियान के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिए।
नशे से दूर रहने की अपील
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नशे के दुष्परिणामों से किशोरों और युवाओं को समय रहते परिचित कराना जरूरी है। नशे के विरूद्ध वातावरण बनाने के उद्देश्य से स्कूली और महाविद्यालयीन स्तरों के पाठ्यक्रमों में नशे के विरूद्ध जागरूकता पर केंद्रित सामग्री शामिल की जाए। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए, उनकी क्षमता अनुसार कौशल उन्नयन की गतिविधियां भी संचालित की जाएं। प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में दान स्वरूप प्राप्त हो रही राशि और सामग्री से स्थानीय स्तर पर निराश्रितों, भिक्षुकों आदि के भोजन तथा अन्य कल्याणकारी गतिविधियां संचालित करने के लिए कार्य योजना विकसित की जाएं।
168 स्मार्ट क्लास तैयार
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री सेवा पखवाड़ा अभियान वर्ष 2025 के अंतर्गत प्रदेश में 6 करोड़ 52 लाख रुपए के कृत्रिम अंग अथवा सहायक यंत्र दिव्यागंजन को उपलब्ध कराये गये। प्रदेश में दिव्यांगजन के लिए संचालित विशेष विद्यालयों में दिव्यांगजन के लिए 168 स्मार्ट क्लास तैयार किए गए हैं। नशामुक्ति भारत अभियान के अंतर्गत 12 हजार वालेंटियर्स बनाए गए हैं। ये सभी नशे के दुष्परिणामों से जनसामान्य को अवगत करा रहे हैं। दिव्यांगजन को आत्मनिर्भर बनाने तथा उन्हें रोजगार उपलबध कराने के लिए भारत सरकार से प्राप्त पुरस्कार संस्थानों से एमओयू किया गया है। इन संस्थाओं द्वारा 12 दिव्यांगजन को रोजगार उपलब्ध कराया गया। वृद्धजन की देखभाल के लिए 54 प्रतिभागियों को केयर गिवर का प्रशिक्षण दिलवाया गया। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभाग में संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की।