मध्य प्रदेश में जन्म-मृत्यु पंजीयन अपडेट

दो साल पुराने जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र पर राहत, MP में अभी पुरानी प्रक्रिया से ही होगा पंजीयन

मध्य प्रदेश में दो साल से पुराने जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जारी रहेगी जब तक नई व्यवस्था लागू नहीं हो जाती।

By : सोनिया रायकवार
दो साल पुराने जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र पर राहत, MP में अभी पुरानी प्रक्रिया से ही होगा पंजीयन

 

मध्य प्रदेश में दो साल से अधिक पुराने जन्म और मृत्यु के मामलों के विलंबित पंजीयन को लेकर चल रहा असमंजस अब दूर हो गया है। आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था लागू होने तक ऐसे मामलों में पहले से चली आ रही प्रक्रिया के तहत ही पंजीयन किया जाएगा। मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) एवं आयुक्त आर्थिक एवं सांख्यिकी ने सभी कलेक्टरों और अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रारों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। इससे उन लोगों को राहत मिलेगी, जिन्हें जन्म या मृत्यु प्रमाण-पत्र बनवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

जिलों से मिल रही थीं शिकायतें

दरअसल, कई जिलों से शिकायतें सामने आ रही थीं कि प्रशासनिक मजिस्ट्रेट यानी तहसीलदार 6 अगस्त 2026 के जन्म-मृत्यु संशोधन विधेयक के राजपत्र नोटिफिकेशन का हवाला देकर दो साल से अधिक पुराने मामलों के पंजीयन की अनुमति से जुड़े आवेदन स्वीकार नहीं कर रहे हैं। कई लोक सेवा केंद्रों पर भी आवेदन नहीं लिए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इसके चलते लोगों को परेशानी हो रही थी और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतों की संख्या भी बढ़ रही थी।

अभी रजिस्ट्रार जनरल का नया आदेश नहीं

मुख्य रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया है कि रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय, नई दिल्ली की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई नया आदेश या निर्देश जारी नहीं हुआ है। ऐसे में 6 अगस्त के राजपत्र नोटिफिकेशन के आधार पर दो साल से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु मामलों का पंजीयन रोकने का कोई आधार नहीं है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि लोगों के आवेदन अनावश्यक रूप से लंबित न रखें और अधीनस्थ अधिकारियों को भी मौजूदा प्रक्रिया की जानकारी दें।

धारा 13(3) के तहत जारी रहेगी पुरानी प्रक्रिया

फिलहाल जन्म-मृत्यु पंजीयन अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) के तहत विलंबित पंजीयन की प्रक्रिया पहले की तरह लागू रहेगी। यानी दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद जन्म या मृत्यु का पंजीयन कराने के लिए फिलहाल मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार ही आवेदन और कार्रवाई की जाएगी।

नई व्यवस्था में दो साल पुराने मामलों पर सख्ती

2026 के संशोधन में विलंबित पंजीयन की प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक सख्त किया गया है। एक साल से अधिक और दो साल के भीतर सूचना देने पर जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश से पंजीयन किया जाएगा। इसके साथ घटना की सत्यता का सत्यापन भी जरूरी होगा। वहीं दो साल से अधिक पुराने मामलों में प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट यानी JMFC के आदेश की जरूरत होगी। न्यायिक मजिस्ट्रेट पंजीयन का आदेश देने से पहले घटना की सत्यता का सत्यापन करेंगे और निर्धारित शुल्क भी लिया जाएगा।

पहले और अब में क्या बदलेगा?

पहले एक साल से अधिक देरी वाले जन्म-मृत्यु पंजीयन के लिए जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश की व्यवस्था थी। 2026 के संशोधन में दो साल से अधिक पुराने मामलों को कार्यपालक मजिस्ट्रेट के स्तर से हटाकर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के स्तर पर कर दिया गया है। इस बदलाव के बाद दो साल से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु मामलों में सत्यापन और जांच की प्रक्रिया ज्यादा सख्त हो जाएगी। हालांकि मध्य प्रदेश में यह नई व्यवस्था लागू होने तक पुरानी प्रक्रिया ही जारी रहेगी।

2023 में भी हुए थे कई बड़े बदलाव

जन्म-मृत्यु पंजीयन व्यवस्था में 2023 में भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए थे। इनमें राष्ट्रीय स्तर पर जन्म-मृत्यु का डेटाबेस तैयार करना और राज्यों के एकीकृत डेटाबेस की व्यवस्था शामिल थी। इसके अलावा उपलब्ध होने पर माता-पिता और सूचनादाता का आधार नंबर दर्ज करने, गोद लिए, सरोगेसी से जन्मे और एकल या अविवाहित मां से जन्मे बच्चों के मामलों में सूचना दर्ज करने जैसी व्यवस्थाएं भी जोड़ी गई थीं। जन्म प्रमाण-पत्र को जन्मतिथि और जन्मस्थान के प्रमाण के रूप में भी महत्वपूर्ण बनाया गया है। शैक्षणिक प्रवेश, मतदाता सूची और सरकारी नौकरी समेत कई कामों में इसका इस्तेमाल किया जाता है। इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी इसमें शामिल है।

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