अगर आपकी नींद भी रात में अचानक खुल जाती है और इसके बाद दोबारा सोने में काफी परेशानी होती है, तो इसे हमेशा सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कभी-कभार रात में नींद खुलना सामान्य है, लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी हुई है और सुबह उठने के बाद भी थकान महसूस होती है, तो इसके पीछे तनाव, अनिद्रा या स्लीप एपनिया जैसी वजहें हो सकती हैं। अच्छी नींद शरीर और दिमाग दोनों के लिए बेहद जरूरी है। नींद पूरी न होने पर दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में परेशानी और काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में बार-बार नींद टूटने की वजह को समझना जरूरी है।
तनाव और चिंता भी हो सकती है वजह
रात में बार-बार नींद खुलने की सबसे आम वजहों में तनाव और चिंता शामिल हैं। दिनभर किसी बात को लेकर परेशान रहने या लगातार सोचते रहने से दिमाग पूरी तरह रिलैक्स नहीं हो पाता। इसका असर नींद पर भी पड़ सकता है और व्यक्ति को रात में अचानक जागने की समस्या हो सकती है। इसके अलावा कमरे का वातावरण भी नींद को प्रभावित करता है। ज्यादा रोशनी, शोर, गर्मी या ठंड, असहज गद्दा और गलत तकिया नींद टूटने की वजह बन सकते हैं। रात में चाय-कॉफी का ज्यादा सेवन, देर तक मोबाइल या लैपटॉप चलाना और रोज अलग-अलग समय पर सोना भी नींद के पैटर्न को बिगाड़ सकता है।
क्या अनिद्रा की वजह से खुलती है नींद?
अनिद्रा यानी इंसोम्निया ऐसी स्थिति है, जिसमें पर्याप्त समय और अवसर मिलने के बावजूद व्यक्ति को सोने या नींद बनाए रखने में परेशानी होती है। इसमें रात के बीच में बार-बार नींद खुलना, जागने के बाद दोबारा सोने में काफी समय लगना या सुबह सामान्य समय से पहले नींद खुल जाना शामिल हो सकता है अनिद्रा की वजह से अगले दिन थकान, सुस्ती, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी हो सकती है। अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
खर्राटों के साथ नींद खुलना हो सकता है स्लीप एपनिया का संकेत
स्लीप एपनिया नींद से जुड़ी एक गंभीर समस्या है। इसमें सोते समय व्यक्ति की सांस बार-बार रुक सकती है और फिर दोबारा शुरू हो सकती है। इसके कारण रात में अचानक नींद खुलना, तेज खर्राटे लेना, नींद में हांफना या घुटन महसूस होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।कई बार व्यक्ति को खुद पता नहीं चलता कि सोते समय उसकी सांस रुक रही है। परिवार का कोई सदस्य तेज खर्राटे, सांस रुकने या अचानक हांफने जैसी समस्या को नोटिस कर सकता है। दिन में अत्यधिक नींद आना या सुबह उठने के बाद भी तरोताजा महसूस न होना भी ध्यान देने वाले संकेत हैं।
अच्छी नींद के लिए बदलें ये आदतें
अच्छी नींद के लिए सबसे जरूरी है कि सोने और जागने का समय नियमित रखा जाए। दिन में शारीरिक रूप से सक्रिय रहना और नियमित व्यायाम करना भी नींद की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद कर सकता है। सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप और दूसरी स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना बेहतर है। इसकी जगह किताब पढ़ना, हल्का संगीत सुनना या रिलैक्सेशन जैसी गतिविधियां की जा सकती हैं। कमरे को शांत, अंधेरा और आरामदायक रखना भी नींद के लिए फायदेमंद है।
कब डॉक्टर से लेनी चाहिए सलाह?
अगर रात में बार-बार नींद खुलती है, लंबे समय तक दोबारा नींद नहीं आती, तेज खर्राटे आते हैं या सोते समय सांस रुकने जैसी समस्या महसूस होती है, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर जब यह समस्या लगातार बनी रहे और दिनभर की ऊर्जा, मूड या काम करने की क्षमता पर असर पड़ने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेकर इसके सही कारण की जांच कराना बेहतर होता है। सही वजह का पता लगाकर ही उचित समाधान और बेहतर नींद की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।