करीब आठ दशकों से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को अब आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस परियोजना को जल सुरक्षा, सिंचाई, पेयजल, ऊर्जा और यमुना के पुनर्जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण अंतरराज्यीय परियोजना के रूप में देखा जा रहा है।
1940 में हुई थी परियोजना की परिकल्पना
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि किशाऊ परियोजना की परिकल्पना वर्ष 1940 में की गई थी। लंबे समय से विभिन्न प्रयासों के बावजूद कई कारणों से परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई। उन्होंने कहा कि MoU पर हस्ताक्षर परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने भारत सरकार और सभी सहभागी राज्यों का सहयोग के लिए आभार जताया।
6 राज्यों को मिलेगा परियोजना का लाभ
किशाऊ परियोजना के तहत करीब 1,562 MCM क्षमता का जलाशय बनने की बात कही गई है। इसके साथ ही 422 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करने का प्रस्ताव है। परियोजना से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान सहित अपर यमुना बेसिन को लाभ मिलने की उम्मीद है।
जल सुरक्षा से यमुना पुनर्जीवन तक
मुख्यमंत्री के अनुसार किशाऊ केवल बांध निर्माण की परियोजना नहीं है, बल्कि इसका संबंध जल सुरक्षा, सिंचाई, पेयजल और ऊर्जा से भी है। परियोजना को यमुना के पुनर्जीवन से भी जोड़ा गया है। उन्होंने इसे अंतरराज्यीय सहयोग और सहकारी संघवाद का उदाहरण बताया। केंद्र और सहभागी राज्यों के बीच समन्वय से वर्षों से लंबित परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रगति हुई है।
2,500 हेक्टेयर वन भूमि की जरूरत
परियोजना के लिए करीब 2,500 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता होगी। इसके चलते क्षतिपूरक वनीकरण के लिए भी बड़ी मात्रा में भूमि की जरूरत पड़ेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार और सहभागी राज्यों से क्षतिपूरक वनीकरण के लिए आवश्यक भूमि चिन्हित करने में उत्तराखंड को सहयोग देने का अनुरोध किया है।
पर्यावरणीय नियमों के पालन पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। परियोजना से जुड़े सभी पर्यावरणीय और वन संबंधी प्रावधानों का नियमानुसार पालन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और सभी सहभागी राज्य मिलकर किशाऊ परियोजना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाएंगे। MoU पर हस्ताक्षर को उन्होंने दशकों से लंबित परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।