रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के B.Sc. कृषि पाठ्यक्रम की परीक्षाओं के पेपर लीक मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने प्रोफेसर समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो आरोपी अब भी फरार हैं। मामला रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है। जांच में सामने आया कि दुर्ग के एक निजी कृषि कॉलेज का प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया पेपर लीक का मास्टरमाइंड था। पुलिस के मुताबिक, उसने सीलबंद प्रश्नपत्र के लिफाफे में छोटा छेद कर उसमें करीब ₹2,500 में खरीदा एंडोस्कोपी कैमरा डाला और प्रश्नपत्र का वीडियो बना लिया। इसके बाद पेपर की सामग्री की नकल तैयार कर छात्रों को ₹11 हजार में बेच दिया गया।
दो परीक्षाओं के पेपर लीक होने का मामला
पुलिस के मुताबिक, शुरुआत में B.Sc. कृषि सेकंड ईयर के दूसरे सेमेस्टर के कीटशास्त्र (Entomology) विषय का पेपर लीक होने की जानकारी सामने आई थी। जांच आगे बढ़ी तो फर्स्ट ईयर के प्लांट पैथोलॉजी का पेपर भी लीक किए जाने का खुलासा हुआ। प्लांट पैथोलॉजी की परीक्षा 7 अगस्त और कीटशास्त्र की परीक्षा 20 अगस्त को होनी थी। दोनों परीक्षाएं विश्वविद्यालय से जुड़े 28 कृषि कॉलेजों में आयोजित की जानी थीं। पेपर लीक की जानकारी कवर्धा कृषि कॉलेज और विश्वविद्यालय के अधिकारियों को ई-मेल के जरिए मिली थी। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
ऐसे बनाया प्रश्नपत्र का वीडियो
जांच में सामने आया कि आरोपी प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया पिछले करीब एक साल से अपने कॉलेज की उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने और आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लेने के लिए रायपुर कृषि महाविद्यालय आता था। पुलिस के मुताबिक, 17 अगस्त को वह उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने रायपुर के जोरा स्थित कृषि महाविद्यालय पहुंचा था। इसी दौरान उसने आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लिए। कॉलेज में पेपर रखने के बाद उसने 20 अगस्त को होने वाली कीटशास्त्र परीक्षा का प्रश्नपत्र वाला सीलबंद लिफाफा अपने घर ले गया। घर पहुंचने के बाद उसने सुई और नुकीले उपकरण की मदद से लिफाफे में छोटा छेद किया। इसके बाद एंडोस्कोपी कैमरे को उस छेद के जरिए अंदर डालकर प्रश्नपत्र का वीडियो बना लिया। इसके बाद वीडियो देखकर प्रश्नपत्र की सामग्री की नकल तैयार की गई और इसे छात्रों तक पहुंचाया गया।
₹11 हजार में छात्रों को बेचा पेपर
पुलिस के अनुसार, तैयार किए गए प्रश्नपत्र को प्रोफेसर ने अपने कॉलेज के छात्र अजय नायक समेत तीन छात्रों को ₹11 हजार में बेचा। इसके बाद पेपर आगे कई छात्रों तक पहुंचा और सोशल मीडिया के जरिए वायरल हो गया। पेपर वायरल होने की जानकारी सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने परीक्षा स्थगित कर दी और मामले की शिकायत तेलीबांधा थाने में दर्ज कराई।
करीब 36 घंटे में पुलिस ने खोला मामला
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच और संदिग्धों से पूछताछ शुरू की। जांच के दौरान दुर्ग निवासी अनुज मिंज के बारे में जानकारी मिली। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद पुलिस की अलग-अलग टीमें कबीरधाम, रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर समेत कई जिलों में भेजी गईं। पुलिस के मुताबिक, करीब 36 घंटे की लगातार जांच के बाद पेपर लीक के पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ और 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में पेपर लीक का कनेक्शन दुर्ग के एक निजी कृषि कॉलेज से सामने आया।
6 मोबाइल और रिकॉर्डिंग डिवाइस समेत सामान जब्त
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹11 हजार नकद, 6 मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस, केबल, मोबाइल कनेक्टर, सुई, सूजा, कॉपी और फेविकोल समेत अन्य सामान जब्त किया है। पुलिस अब जब्त किए गए मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रश्नपत्र कितने लोगों तक पहुंचा और इसे सोशल मीडिया पर किसने वायरल किया।
6 आरोपी गिरफ्तार, 2 अब भी फरार
इस मामले में पुलिस ने कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पेपर लीक के इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।