हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा ऐलान किया है। सोलन जिले के अर्की में आयोजित राज्य स्तरीय सायर मेले के समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशभर के CBSE स्कूलों में अगले तीन महीनों के भीतर 2,000 और शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों का चयन योग्यता के आधार पर और बिना किसी सिफारिश के किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ महीने पहले जब राज्य सरकार ने प्रदेश में 150 CBSE स्कूल खोलने की घोषणा की थी, तब इस फैसले का विरोध हुआ था। हालांकि, अब इन स्कूलों में शिक्षक नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। प्रत्येक CBSE स्कूल में पहले ही पांच से आठ शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है और शेष पदों को भी जल्द भरा जाएगा।
सरकारी स्कूलों में कम खर्च में CBSE शिक्षा का लक्ष्य
सुक्खू ने कहा कि निजी स्कूलों में CBSE शिक्षा हासिल करना काफी महंगा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि सरकारी स्कूलों में भी इसी स्तर की सुविधाएं अपेक्षाकृत कम खर्च में उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने दिग्गल, भूमती और जय नगर के स्कूलों को CBSE स्कूलों में परिवर्तित करने की घोषणा भी की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सुधार कर रही है। मेडिकल कॉलेजों में 15 से 19 वर्ष पुराने उपकरणों को आधुनिक मशीनरी से बदला गया है और जांच सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। सरकार ने हाल में 200 चिकित्सकों की भर्ती की है, जबकि जल्द ही 228 और डॉक्टरों की भर्ती की जाएगी। अर्की में भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी सरकार का जोर
सुक्खू ने कहा कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े कई कदम उठा रही है। दूध के खरीद मूल्य में वृद्धि की गई है और अदरक को न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था के दायरे में लाया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ पहुंचाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समझौते के तहत हिमाचल के हितों की रक्षा की गई है। उनके अनुसार, राज्य को बिजली परियोजना की लागत के रूप में पड़ने वाले अनुमानित आर्थिक बोझ से बचाने के लिए लाभार्थी राज्यों के साथ शर्तों पर सहमति बनाई गई। उन्होंने दावा किया कि पुराने प्रावधानों के चलते हिमाचल पर 3,000 से 5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता था और राज्य संभावित वार्षिक आय से भी वंचित हो सकता था। हालिया समझौते में छह राज्यों ने परियोजना को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है।
भ्रष्टाचार पर कार्रवाई और विकास कार्यों का दावा
मुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में बद्दी, बरोटीवाला और नालागढ़ में करीब 5,000 बीघा भूमि आवंटित किए जाने को लेकर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे आवंटनों को रद्द करने पर विचार कर रही है। सुक्खू ने यह भी दावा किया कि उनकी सरकार द्वारा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने से करीब 3,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है और इन संसाधनों का इस्तेमाल विधवाओं, बच्चों तथा अन्य जरूरतमंद वर्गों की कल्याणकारी योजनाओं में किया जा रहा है। ये दावे मुख्यमंत्री के हैं और स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं लिए जाने चाहिए।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने कुनिहार-सारमा, मांगू-मलावण, जाबल-जय नगर, भूमती-डाडल-पिपलूघाट और कोहू-भियूंकरी वाया सौर सड़कों की मरम्मत के लिए धन उपलब्ध कराने की घोषणा की। उन्होंने अर्की में कौशल विकास केंद्र खोलने के प्रस्ताव पर विचार करने और शिमला-धैना बस सेवा बहाल करने का भी आश्वासन दिया।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने काली माता मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। विधायक संजय अवस्थी ने सायर मेले की 388 वर्ष पुरानी परंपरा का उल्लेख करते हुए क्षेत्र में हुए विकास कार्यों की जानकारी दी।