हिमाचल में वैज्ञानिक ड्रेजिंग की मांग

हिमाचल में नदियों की ड्रेजिंग पर CM सुक्खू ने मांगी खुली छूट, बोले- बरसात में तबाही का कारण बनता है मलबा

हिमाचल प्रदेश में बाढ़ के बाद नदी चैनलों में मलबा जमा हो जाता है, जिसे हटाने के लिए मुख्यमंत्री सुक्खू ने वैज्ञानिक ड्रेजिंग की अनुमति और स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग की है।

By : रोहन उमक
हिमाचल में नदियों की ड्रेजिंग पर CM सुक्खू ने मांगी खुली छूट, बोले- बरसात में तबाही का कारण बनता है मलबा

हिमाचल में नदियों की ड्रेजिंग पर CM सुक्खू ने मांगी खुली छूट, बोले- बरसात में तबाही का कारण बनता है मलबा

हिमाचल प्रदेश में हर साल मानसून के दौरान बाढ़ और फ्लैश फ्लड से होने वाली तबाही के बीच नदियों में जमा मलबा अब बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। उन्होंने बाढ़ प्रभावित नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक और समयबद्ध तरीके से ड्रेजिंग की अनुमति देने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।

केंद्र में अनुमति मांगते हुए सीएम सुक्खू

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारी बारिश और बाढ़ के बाद नदी चैनलों में बड़ी मात्रा में मलबा, बोल्डर, पत्थर, रेत और बजरी जमा हो जाती है। इससे नदियों की पानी वहन करने की क्षमता प्रभावित होती है और आसपास की बस्तियों, सड़कों, पुलों, जंगलों तथा अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।

वैज्ञानिक ड्रेजिंग के लिए स्पष्ट नियमों का आश्वासन

सुक्खू ने कहा कि संवेदनशील नदी क्षेत्रों में वैज्ञानिक तरीके से ड्रेजिंग करना आपदा जोखिम कम करने के लिए जरूरी है। इस पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने हिमाचल में वैज्ञानिक ड्रेजिंग के लिए स्पष्ट और सक्षम दिशा-निर्देश जारी करने का आश्वासन दिया।

केंद्रीय मंत्री ने भरोसा दिलाया कि प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा और हिमाचल की व्यावहारिक जरूरतों तथा हितों को प्राथमिकता दी जाएगी।

परिवेश पोर्टल पर अलग श्रेणी की मांग

मुख्यमंत्री ने केंद्र से परिवेश पोर्टल पर नदी ड्रेजिंग के लिए अलग श्रेणी बनाने की मांग की। उन्होंने इसे सामान्य खनन गतिविधियों से अलग रखने पर जोर दिया।

सुक्खू का तर्क था कि बाढ़ के बाद नदी से मलबा हटाने का मकसद खनन करना नहीं, बल्कि नदी की जल वहन क्षमता बहाल करना और जल प्रवाह में मौजूद अवरोधों को हटाकर लोगों तथा बुनियादी ढांचे को बाढ़ से बचाना है।

उन्होंने ड्रेजिंग परियोजनाओं को प्रतिपूरक वनीकरण की अनिवार्यता से छूट देने की मांग भी की। मुख्यमंत्री के मुताबिक, ऐसी गतिविधियों में वन भूमि का गैर-वनीय इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि नदी का प्रवाह सुचारू करने और बाढ़ का खतरा कम करने के लिए काम किया जाता है।

वैज्ञानिक सर्वे के बाद ही हटेगा मलबा

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ड्रेजिंग का काम मनमाने तरीके से नहीं किया जाएगा। इसके लिए वैज्ञानिक आकलन, रीप्लेनिशमेंट स्टडी और विस्तृत ड्रेजिंग प्लान तैयार किया जाएगा। नदी से कितनी मात्रा में मलबा निकाला जाएगा और कितने क्षेत्र में ड्रेजिंग होगी, यह वैज्ञानिक मानकों के आधार पर तय किया जाएगा।

ड्रेजिंग का काम केवल गैर-मानसून अवधि में पर्यावरणीय नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप किया जाएगा। नदी से निकाले गए मलबे के सुरक्षित निस्तारण और नियंत्रित उपयोग की व्यवस्था बनाने की मांग भी केंद्र के सामने रखी गई।

सरकार के अनुसार, मलबे के विनियमित उपयोग से प्राप्त शुद्ध राजस्व को सतत विकास और वन संबंधी गतिविधियों पर खर्च किया जाएगा।

क्या है परिवेश पोर्टल?

परिवेश पोर्टल केंद्र सरकार का ऑनलाइन पर्यावरणीय मंजूरी पोर्टल है। इसके जरिए उद्योगों और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़ी पर्यावरण, वन और वन्यजीव संबंधी मंजूरियों के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जाता है और पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जाती है।

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