हिमाचल प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को ब्यास नदी समेत प्रदेश की अन्य प्रमुख नदियों में ड्रेजिंग और माइनिंग का मुद्दा जोर-शोर से उठा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में बताया कि राज्य सरकार माइनिंग के लिए अलग विभाग गठित करने और नदियों में जमा मलबे व सामग्री को वैज्ञानिक तरीके से हटाने के लिए नई ड्रेजिंग नीति लाने की दिशा में काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की पांच प्रमुख नदियों में वैज्ञानिक तरीके से ड्रेजिंग और डीसिल्टिंग की जाए तो इससे राज्य को हर साल करीब 2,000 से 3,000 करोड़ रुपये तक की आय हो सकती है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में केंद्र सरकार के साथ भी चर्चा चल रही है और नियमों में जरूरी बदलाव को लेकर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
2023 की आपदा के बाद ड्रेजिंग का सुझाव
मुख्यमंत्री सुक्खू ने वर्ष 2023 की प्राकृतिक आपदा का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान नदियों में बड़ी मात्रा में मलबा और अन्य सामग्री जमा हो गई थी। इसके बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नदियों से जमा सामग्री हटाने के लिए ड्रेजिंग का सुझाव दिया था।
सुक्खू के मुताबिक, ड्रेजिंग की अनुमति तो मिल गई थी, लेकिन माइनिंग की मंजूरी नहीं मिल सकी। इसके चलते बड़ी मात्रा में जमा सामग्री को समय रहते नहीं हटाया जा सका और बाद में बारिश के दौरान इसका एक हिस्सा बह गया।
ड्रेजिंग और माइनिंग अलग-अलग प्रक्रिया
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने सदन में स्पष्ट किया कि ड्रेजिंग और माइनिंग दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही नई ड्रेजिंग नीति लेकर आएगी। अदालतों के निर्देशों के अनुसार ड्रेजिंग से निकाली गई सामग्री की नीलामी की जा सकती है, लेकिन उसे सीधे बेचने की अनुमति नहीं है।
मंत्री ने बताया कि प्रदेश में ड्रेजिंग के लिए करीब 324 साइटों की पहचान की गई है। हालांकि, वन संरक्षण अधिनियम के तहत आवश्यक मंजूरी नहीं मिलने के कारण इनमें से केवल पांच-छह स्थानों पर ही काम आगे बढ़ सका है।
उन्होंने बताया कि कुल्लू में 44 साइटों की नीलामी की गई थी, लेकिन वन मंजूरी के अभाव में ज्यादातर परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पाईं।
विपक्ष ने उठाए अनियमितताओं पर सवाल
मामले को लेकर सदन में भाजपा विधायकों सुरेंद्र शौरी और विक्रम ठाकुर के साथ नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने ड्रेजिंग से निकाली गई सामग्री, उससे होने वाले राजस्व और कथित अनियमितताओं पर सरकार से विस्तृत जानकारी देने की मांग की।
जयराम ठाकुर ने ब्यास नदी में रात के समय मशीनों के जरिए सामग्री निकाले जाने का आरोप भी लगाया और पूरे मामले का विवरण सदन के समक्ष रखने की मांग की।
माइनिंग रॉयल्टी से बढ़ी सरकार की कमाई
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में माइनिंग रॉयल्टी से हिमाचल प्रदेश को 356 करोड़ रुपये की आय हुई। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में यह आंकड़ा करीब 240 करोड़ रुपये था।
मंत्री के मुताबिक, नई माइनिंग नीति लागू होने के बाद राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब सरकार ड्रेजिंग के लिए नई नीति और माइनिंग के लिए अलग विभाग की संभावनाओं पर आगे बढ़ रही है।