मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में उत्तराखण्ड स्टेट सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एण्ड गुड गवर्नेंस (USCPPGG) की शासी निकाय की बैठक की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों, चुनौतियों और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नीति निर्माण में शोध, नवाचार और प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने शोध एवं अध्ययनों के निष्कर्षों का उपयोग राज्य की नीतियों और योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में करने के निर्देश दिए।
MSME और होम टूरिज्म से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
बैठक में शासी निकाय के सदस्यों ने उत्तराखण्ड के समग्र और दीर्घकालिक विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। राज्य में ‘हाई वैल्यू-लो वॉल्यूम’ उत्पादों को बढ़ावा देने और MSME सेक्टर पर विशेष फोकस करने पर जोर दिया गया। पर्वतीय क्षेत्रों में होम टूरिज्म को बढ़ावा देने की बात कही गई, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकेंगे। साथ ही, राज्य के भावी विकास से जुड़े आठ प्रमुख सुधार क्षेत्रों पर विस्तृत शोध और अध्ययन कराने का सुझाव दिया गया।
उत्तराखण्ड-2047 के लिए तैयार होगी दीर्घकालिक रणनीति
बैठक में विकसित उत्तराखण्ड-2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए राज्य की भावी विकास रणनीति पर भी चर्चा हुई। आर्थिक विकास एवं रोजगार, मानव संसाधन एवं कल्याण, वन, जैव विविधता एवं जलवायु अनुकूलन, अवस्थापना विकास, स्थानीय स्वशासन एवं क्षेत्रीय विकास तथा तकनीक आधारित सुशासन जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। बैठक में यह भी बताया गया कि सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के क्षेत्र में उत्तराखण्ड हिमालयी राज्यों में प्रथम स्थान पर है। इसके अलावा प्रमुख विश्वविद्यालयों के प्रतिवर्ष 10 स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को कैपस्टोन परियोजना के लिए स्टाइपेंड देने पर सहमति बनी।
‘Uttarakhand at 25’ पुस्तक का किया विमोचन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर ‘Uttarakhand at 25: A Himalayan State with Infinite Possibilities’ पुस्तक का विमोचन भी किया। पुस्तक में उत्तराखण्ड की 25 वर्षों की विकास यात्रा को समाहित किया गया है। मुख्यमंत्री ने शासी निकाय के सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों का परीक्षण कर उपयोगी सुझावों पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास को गति देने के लिए शोध, नवाचार, प्रभावी नीति निर्माण, क्षमता विकास और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन पर लगातार काम किया जाना जरूरी है।