मिर्जापुर की दुनिया बड़े पर्दे पर

मिर्जापुर: द मूवी रिव्यू—परदे पर लौटा मुन्ना का स्वैग, रवि किशन ने दिया सरप्राइज; 3 घंटे 17 मिनट की फिल्म

मिर्जापुर वेब सीरीज का सिनेमाई रूपांतरण 'मिर्जापुर: द मूवी' सिनेमाघरों में दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहा, हालांकि इसकी लंबाई ने कुछ चुनौतियाँ पेश कीं।

By : सोनिया रायकवार
मिर्जापुर: द मूवी रिव्यू—परदे पर लौटा मुन्ना का स्वैग, रवि किशन ने दिया सरप्राइज; 3 घंटे 17 मिनट की फिल्म

 

‘मिर्जापुर’ की दुनिया में कानून से ज्यादा ताकतवर बंदूक और बंदूक से ज्यादा ताकतवर सही वक्त पर चली चाल है। तीन सीजन तक ओटीटी पर इस दुनिया का भौकाल देखने के बाद अब गुरमीत सिंह इसे बड़े पर्दे पर लेकर आए हैं। अच्छी बात यह है कि फिल्म को सिर्फ सीरीज का लंबा एपिसोड बनाने के बजाय सिनेमाई विस्तार देने की कोशिश की गई है। 3 घंटे 17 मिनट लंबी यह फिल्म कई जगह बड़े पर्दे पर शानदार असर छोड़ती है, हालांकि कुछ हिस्सों में कहानी अपनी मंजिल तक पहुंचने में जरूरत से ज्यादा समय लेती है।

कहानी में सत्ता, बदला,वर्चस्व की लड़ाई

फिल्म की कहानी उसी दुनिया में आगे बढ़ती है, जहां सत्ता की कुर्सी खाली होते ही बंदूकों की आवाज सुनाई देने लगती है। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ सीरीज की टाइमलाइन के बीच का एक नया अध्याय सामने रखती है। कालीन भैया यानी पंकज त्रिपाठी के लिए सत्ता सिर्फ गद्दी नहीं, बल्कि विरासत और दबदबे का सवाल है। वहीं गुड्डू पंडित यानी अली फजल की दुनिया बदले और ताकत के इर्द-गिर्द घूमती है। मुन्ना त्रिपाठी यानी दिव्येंदु की वापसी पुराने समीकरणों को फिर खतरनाक बना देती है। कहानी मिर्जापुर से निकलकर राजस्थान के रेगिस्तान तक पहुंचती है, जहां बदला, धोखा और वर्चस्व की लड़ाई नए मोड़ लेती है।

मुन्ना की वापसी और रवि किशन का नया रंग

फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण मुन्ना त्रिपाठी के किरदार की वापसी है। दिव्येंदु शर्मा एक बार फिर मुन्ना की बेपरवाही, सनक और खतरनाक मासूमियत को प्रभावी तरीके से पर्दे पर उतारते हैं। पंकज त्रिपाठी का कालीन भैया कम बोलकर भी सीन पर अपनी पकड़ बनाए रखते हैं, जबकि अली फजल का गुड्डू पहले से ज्यादा कठोर और सत्ता की भूख से भरा नजर आता है। रवि किशन का बब्बुआ यादव फिल्म में नई ऊर्जा लेकर आता है। उनका देसी अंदाज और आक्रामकता कहानी में नया रंग भरता है। रसिका दुग्गल, जितेंद्र कुमार, अभिषेक बनर्जी और राजेश तैलंग समेत बाकी कलाकार भी अपने किरदारों के साथ प्रभाव छोड़ते हैं।

संवाद और स्क्रीनप्ले अब भी फिल्म की ताकत

पुनीत कृष्णा की लिखाई ‘मिर्जापुर’ की पहचान रही है और फिल्म में भी संवाद कहानी की रीढ़ बने हुए हैं। कई सीन्स में गोली चलने से पहले ही संवाद तनाव पैदा कर देते हैं। हिंसा के बीच आने वाला देसी हास्य भी फिल्म को लगातार गंभीर बने रहने से बचाता है। हालांकि फिल्म की लंबाई यहां परेशानी पैदा करती है। कई किरदारों, पुराने रिश्तों और नए समीकरणों को साथ लेकर चलने की कोशिश में इंटरवल के बाद कहानी कुछ जगह धीमी पड़ती है। कुछ हिस्सों को छोटा किया जाता तो फिल्म की रफ्तार और असर दोनों बेहतर हो सकते थे।

बड़े पर्दे पर एक्शन का अलग असर

ओटीटी पर ‘मिर्जापुर’ की बंदूकें और हिंसा पहले भी दर्शकों को प्रभावित करती रही हैं, लेकिन सिनेमाघर में इनका स्केल अलग दिखाई देता है। गोलियों की आवाज, हाथापाई, खून-खराबा और बड़े एक्शन सीक्वेंस फिल्म को थिएटर वाला अनुभव देते हैं। खास तौर पर राजस्थान के रेगिस्तान में फिल्म का प्री-क्लाइमैक्स और क्लाइमैक्स शानदार तरीके से फिल्माया गया है। लोकेशन, कैमरा वर्क और सिनेमैटोग्राफी मिलकर एक्शन को ज्यादा प्रभावशाली बनाते हैं।

3 घंटे 17 मिनट की लंबाई बनी सबसे बड़ी कमी

फिल्म का पहला हिस्सा कहानी और किरदारों को तेजी से स्थापित करता है और इंटरवल तक कई सीक्वेंस मनोरंजक बने रहते हैं। लेकिन दूसरे हिस्से में स्क्रीनप्ले कुछ जगह जरूरत से ज्यादा चीजों को समझाता हुआ नजर आता है, जिससे रफ्तार प्रभावित होती है। कुछ दृश्य कहानी को आगे बढ़ाने के बजाय उसकी गति को धीमा करते हैं। फिल्म करीब 15-20 मिनट छोटी होती तो इसका प्रभाव और बेहतर हो सकता था। हालांकि आखिरी हिस्से में कहानी फिर रफ्तार पकड़ती है और एक्शन के साथ फिल्म अपना वजन वापस हासिल कर लेती है।

गुरमीत सिंह का डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष

निर्देशक गुरमीत सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती ‘मिर्जापुर’ की ओटीटी वाली पहचान को बड़े पर्दे की भाषा में बदलने की थी। फिल्म इस मामले में काफी हद तक सफल रहती है। मास एलिवेशन के बावजूद यह अपनी मूल दुनिया और किरदारों की पहचान से बाहर नहीं जाती। बैकग्राउंड स्कोर एंट्री और एक्शन सीक्वेंस को जरूरी ऊर्जा देता है। गानों को कहानी पर हावी नहीं होने दिया गया है। निर्माण कला, लोकेशन और कैमरा वर्क फिल्म के बड़े स्केल को मजबूत करते हैं।

फाइनल वर्डिक्ट—मिर्जापुर के फैंस के लिए थिएटर का भौकाल

‘मिर्जापुर: द मूवी’ की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यह फ्रेंचाइजी के पुराने भौकाल को बड़े पर्दे पर प्रभावी तरीके से पेश करती है। कालीन भैया का ठहराव, गुड्डू का गुस्सा, मुन्ना का पागलपन और बब्बुआ यादव की आक्रामकता फिल्म को कई यादगार पल देते हैं। कहानी, कलाकार, संवाद और क्लाइमैक्स मजबूत हैं, लेकिन स्क्रीनप्ले की कसावट और फिल्म की लंबाई इसकी सबसे बड़ी कमजोरी बनती है। कुल मिलाकर, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ वही पुराना भौकाल बड़े पर्दे पर लेकर आती है—बारूद भरपूर है, किरदार अपने रंग में हैं, लेकिन थोड़ी कम लंबाई इसे और ज्यादा धारदार बना सकती थी।

संबंधित सामग्री

Hema Malini Birthday: कैसे मिला ‘ड्रीम गर्ल’ का खिताब? शाहरुख खान की फिल्म से जुड़ा खास किस्सा, जानें 10 दिलचस्प बातें

Hema Malini Birthday: कैसे मिला ‘ड्रीम गर्ल’ का खिताब? शाहरुख खान की फिल्म से जुड़ा खास किस्सा, जानें 10 दिलचस्प बातें

हिंदी सिनेमा की 'ड्रीम गर्ल' हेमा मालिनी ने अपने करियर में अभिनय, नृत्य, निर्देशन और राजनीति में अपनी खास पहचान बनाई है।

16 Oct 2026
ग्वालियर में लिफ्ट में फंसे पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, 15 मिनट बाद सुरक्षित निकाले गए

ग्वालियर में लिफ्ट में फंसे पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, 15 मिनट बाद सुरक्षित निकाले गए

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में, भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा एक लिफ्ट में तकनीकी खराबी के कारण फंस गए। उन्हें कर्मचारियों ने सुरक्षित बाहर निकाला।

13 Oct 2026
घूमने में भी भरपूर आराम, Gen Z का ये ‘रूम रॉटिंग’ ट्रेंड क्या है?

घूमने में भी भरपूर आराम, Gen Z का ये ‘रूम रॉटिंग’ ट्रेंड क्या है?

जेन जेड के युवाओं के बीच छुट्टियों के दौरान कमरे में रहकर आराम करने का ट्रेंड, 'रूम रॉटिंग', तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

12 Oct 2026
Rekha Birthday Special: कभी रंग-रूप पर ताने, कभी निजी जिंदगी पर सवाल, ऐसे बॉलीवुड की 'उमराव जान' बनीं दिग्गज अभिनेत्री

Rekha Birthday Special: कभी रंग-रूप पर ताने, कभी निजी जिंदगी पर सवाल, ऐसे बॉलीवुड की 'उमराव जान' बनीं दिग्गज अभिनेत्री

रेखा, हिंदी सिनेमा की प्रतिष्ठित अभिनेत्री, अपने जन्मदिन पर अपने संघर्ष और सफलताओं की कहानियां साझा करती हैं।

10 Oct 2026
Nana Patekar के निधन से शोक में सिनेमा जगत, CM Bhajan Lal Sharma ने दी श्रद्धांजलि

Nana Patekar के निधन से शोक में सिनेमा जगत, CM Bhajan Lal Sharma ने दी श्रद्धांजलि

नाना पाटेकर के निधन पर भारतीय सिनेमा और राजनीति की हस्तियों ने शोक व्यक्त किया। उनके अभिनय और सामाजिक योगदान की सराहना की गई।

08 Oct 2026