चंडीगढ़। हरियाणा में प्राकृतिक खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से कुरुक्षेत्र जिले में 2 हजार एकड़ का प्राकृतिक खेती क्लस्टर विकसित किया जाएगा। इसे स्मार्ट एग्रीकल्चर पहल के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। खास बात यह है कि इस प्रयोग में किसानों को नुकसान होने पर सरकार उसकी भरपाई करेगी।
प्राकृतिक खेती के लिए बढ़ाया जा रहा दायरा
सरकार के अनुसार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य में पोर्टल भी संचालित किया जा रहा है। करीब 2 लाख किसानों ने लगभग 3 लाख एकड़ जमीन का पंजीकरण कराया है। इनमें से 23,930 किसानों की करीब 44 हजार एकड़ जमीन प्राकृतिक खेती के लिए सत्यापित की जा चुकी है। राज्य में प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण केंद्र कुरुक्षेत्र, जींद, सिरसा और करनाल में संचालित किए जा रहे हैं।
सोलर पंप पर 75 प्रतिशत तक सब्सिडी
कृषि में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत किसानों को सोलर पंप लगाने पर 75 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। सरकार के मुताबिक अब तक 1,95,653 सोलर पंप लगाए जा चुके हैं।
फसल अवशेष प्रबंधन पर भी जोर
सरकार के अनुसार व्यक्तिगत किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़े उपकरणों पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी गई है। वहीं, कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के लिए 80 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है। अब तक 1,11,000 से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें किसानों को उपलब्ध कराई गई हैं और 6,794 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। इन पहलों के तहत करीब 1,017 करोड़ रुपये की सब्सिडी दिए जाने की जानकारी सरकार ने दी है।
पराली प्रबंधन के लिए 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन
धान के अवशेषों के उचित प्रबंधन और गांठ बनाने को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 10 लाख किसानों को इस मद में लगभग 907 से 909 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है।
प्राकृतिक और जैविक खेती के लिए नई योजनाएं
जून 2026 में मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए पंचायत की जमीन पर विशेष नीति बनाने की बात कही थी। सरकार ने यह भी बताया था कि APEDA से प्रमाणित प्राकृतिक और जैविक किसानों को पांच साल तक 10 हजार रुपये प्रति एकड़ सालाना वित्तीय सहायता देने की योजना है।
किसानों को नई तकनीक से जोड़ने पर जोर
कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने खेती को प्रदेश की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण आधारशिला बताते हुए किसानों को नई तकनीक और फसल विविधीकरण से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने मिट्टी, पानी और पर्यावरण के संरक्षण को भी कृषि के साथ महत्वपूर्ण बताया।
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की ओर से कपास समेत कई फसलों की नई किस्मों और तकनीकों पर काम किया जा रहा है। विश्वविद्यालय ने किसानों के लिए उन्नत बीज और खेती की तकनीकों को बढ़ावा देने की जानकारी दी है।
45 प्रगतिशील किसानों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए 45 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। इनमें प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, फसल अवशेष प्रबंधन, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, मधुमक्खी पालन और केंचुआ खाद जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले किसान शामिल रहे। इनमें 30 पुरुष और 15 महिला किसान थे।
9.94 करोड़ की लागत से जैविक खेती उत्कृष्टता केंद्र
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय परिसर में करीब 9.94 करोड़ रुपये की लागत से तैयार दीनदयाल उपाध्याय जैविक खेती उत्कृष्टता केंद्र का भी उद्घाटन किया गया। सरकार के मुताबिक इस केंद्र के जरिए किसानों को जैविक खेती की तकनीक, अनुसंधान और प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य रसायन-मुक्त खेती, मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्तापूर्ण जैविक उत्पादन को बढ़ावा देना है।
कुरुक्षेत्र का 2 हजार एकड़ क्लस्टर इस पूरी पहल का अहम हिस्सा है। सरकार का कहना है कि स्मार्ट एग्रीकल्चर के जरिए प्राकृतिक खेती को तकनीक, प्रशिक्षण और आर्थिक सुरक्षा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। वहीं, किसानों को नुकसान होने पर सरकारी भरपाई का प्रावधान इस प्रयोग के दौरान उनके जोखिम को कम करने के लिए रखा गया है।