हरियाणा के हिसार में आयोजित रबी कृषि मेले में किसानों, कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों को एक साथ आने का मौका मिला। मेले की थीम “सतत कपास उत्पादन, फसल विविधीकरण एवं जल संसाधन सुरक्षा” रखी गई। इस आयोजन का उद्देश्य किसानों को खेती से जुड़ी नई जानकारी देना और उन्हें बदलते समय के साथ बेहतर तरीके अपनाने के लिए जागरूक करना है। कृषि मेले को किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सीधे संवाद का एक अहम मंच बताया गया। यहां किसान अपनी खेती से जुड़ी समस्याओं पर विशेषज्ञों से बातचीत कर सकते हैं और फसल उत्पादन को बेहतर बनाने के तरीके जान सकते हैं। ऐसे आयोजनों के जरिए किसानों तक खेती की नई तकनीक और वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया जाता है।
कपास की खेती पर खास जोर
हरियाणा में कपास प्रमुख नकदी फसलों में शामिल है। राज्य के कई किसान कपास की खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में मेले में कपास के बेहतर और टिकाऊ उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया गया। कार्यक्रम में कृषि विश्वविद्यालय और सिरसा स्थित कपास अनुसंधान केंद्र के काम का भी उल्लेख किया गया। इन संस्थानों की ओर से कपास की नई किस्मों, बेहतर बीज और वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन को लेकर काम किया जा रहा है। किसानों के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले बीज का चुनाव, फसल की सही देखभाल और पानी का बेहतर इस्तेमाल काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। खेती में वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने से उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।
नई सोच और तकनीक से खेती को बढ़ावा
रबी कृषि मेले को केवल खेती की जानकारी देने वाला कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों और नई पीढ़ी को जोड़ने वाला मंच भी बताया गया। कृषि क्षेत्र में युवाओं की बढ़ती रुचि और नए प्रयोगों को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्यक्रम में कहा गया कि वैज्ञानिकों का अनुभव और युवाओं की नई सोच मिलकर हरियाणा की खेती में बदलाव ला सकती है। फसल विविधीकरण, पानी की बचत और टिकाऊ खेती जैसे मुद्दे आने वाले समय में और अहम होंगे। मेले के जरिए किसानों को खेती में नई तकनीक अपनाने, पानी का सही इस्तेमाल करने और फसलों में बदलाव लाने की जानकारी देने पर जोर दिया गया। उम्मीद जताई गई कि ऐसे आयोजन किसानों को नई जानकारी से जोड़ने और कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।