राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन बने हरजीत ग्रेवाल ,किसान आंदोलन के वक्त सुर्खियों में आए

हरजीत ग्रेवाल बने अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन बने हरजीत ग्रेवाल ,किसान आंदोलन के वक्त सुर्खियों में आए

पंजाब BJP के सीनियर नेता हरजीत सिंह ग्रेवाल को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन बनाया गया है। उनका कार्यकाल 3 साल का होगा।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन बने हरजीत ग्रेवाल किसान आंदोलन के वक्त सुर्खियों में आए

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन बने हरजीत ग्रेवाल ,किसान आंदोलन के वक्त सुर्खियों में आए

किसान आंदोलन के वक्त सुर्खियों में आए पंजाब BJP के सीनियर नेता हरजीत सिंह ग्रेवाल को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन बना दिया है। उनका कार्यकाल 3 साल का रहेगा। वह पंजाब में भाजपा के बड़े सिख चेहरे के तौर पर एक्टिव रहे हैं।खास तौर पर दिल्ली बॉर्डर पर हुए किसान आंदोलन के दौरान उन्होंने केंद्र के पक्ष में डटकर बयानबाजी की थी। जिससे वह पंजाब से लेकर नेशनल लेवल तक खूब सुर्खियों में रहे।

बता दे पंजाब चुनाव से पहले उनकी नियुक्ति को सिखों को खुश करने की कोशिश माना जा रहा है। इस मौके मीडिया से बातचीत में ग्रेवाल ने कहा कि मुझे जो जिम्मेदारी मिली है, उसे पूरी तनदेही से निभाऊंगा। मैं इससे पहले भी कई पदों पर काम कर चुका हूं। ग्रेवाल मूल रूप से पटियाला के रहने वाले हैं।
बता दें कि ग्रेवाल तीन दशक से अधिक समय से भाजपा और आरएसएस से जुड़े हैं। 2013 से 2017 तक पंजाब खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के चेयरमैन रहे। 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में राजपुरा सीट से भाजपा उम्मीदवार रहे, हालांकि चुनाव हार गए। वह भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे। इससे पहले पंजाब भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं।

ग्रेवाल BJP का चर्चित चेहरा आखिर क्यों?

1. किसान आंदोलन में भाजपा का प्रमुख चेहरा: 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान ग्रेवाल भाजपा की ओर से सबसे मुखर नेताओं में रहे। वे केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच बातचीत की प्रक्रिया से जुड़े रहे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह से भी कई दौर की बैठकों में शामिल रहे।

2. किसान संगठनों से तीखा टकराव: हरजीत ग्रेवाल ने कई बार आरोप लगाया कि कुछ किसान संगठन आंदोलन खत्म नहीं करना चाहते। उनके इन बयानों का किसान संगठनों ने कड़ा विरोध किया और वे लगातार निशाने पर रहे।

3. खेत में तोड़फोड़ का मामला: जुलाई 2021 में बरनाला के धनौला स्थित उनके खेत में कुछ प्रदर्शनकारियों ने धान की फसल उखाड़ दी थी। इस मामले में FIR दर्ज हुई थी, जिसके बाद किसान संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन किए।

4. SGPC पर बयान: किसान आंदोलन के दौरान उन्होंने SGPC से कहा था कि वह धार्मिक संस्था है और उसे आंदोलन में सक्रिय भूमिका नहीं निभानी चाहिए। इस बयान पर भी विवाद हुआ और SGPC ने उनकी टिप्पणी का विरोध किया।

5. PM मोदी की सुरक्षा चूक पर बयान: जनवरी 2022 में फिरोजपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक के बाद ग्रेवाल ने दावा किया था कि भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले हुए और बसों में तोड़फोड़ की गई। उनके बयान राजनीतिक बहस का विषय बने।

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