उत्तर प्रदेश की पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में आने का ऐलान कर दिया है। मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर उन्होंने अपने फैसले की जानकारी दी। दिव्या ने कहा कि वह उत्तर प्रदेश में ही रहकर काम करेंगी और किसी राजनीतिक दल से जुड़ने के बजाय स्वतंत्र रूप से राजनीति में कदम रखेंगी। दिव्या मित्तल ने कहा कि उन्हें राजनीति में आने के लिए पैसा या बाहुबल नहीं चाहिए। उन्हें सिर्फ लोगों के सहयोग की जरूरत है। उन्होंने कहा, "डरूंगी नहीं, सवाल करूंगी।"
बोलीं- राजनीति नहीं, पूरी व्यवस्था बदलने का इरादा
दिव्या मित्तल ने कहा कि उनका मकसद केवल किसी राजनेता को बदलना नहीं है, बल्कि राजनीति के काम करने के तरीके में बदलाव लाना है। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में सत्ता, शिलान्यास और शोर तो दिखाई देता है, लेकिन कई जगह जरूरी सोच और जवाबदेही की कमी नजर आती है। उन्होंने कहा कि वह देश की आजादी के 80 सालों का हिसाब मांगना चाहती हैं। दिव्या के मुताबिक, उनका उद्देश्य उन लोगों की आवाज उठाना है, जिनकी शिकायतें सरकारी दफ्तरों तक पहुंच नहीं पातीं या पहुंचने के बाद भी उन पर कार्रवाई नहीं होती।
स्कूल और गांवों की समस्याओं का किया जिक्र
दिव्या मित्तल ने अपने IAS कार्यकाल का एक अनुभव साझा करते हुए लहुरियादह की पहाड़ी का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वहां निरीक्षण के दौरान एक महिला उनसे मिली थी। दिव्या के मुताबिक, महिला ने पेंशन या मकान जैसी सुविधा मांगने के बजाय गांव में आगे की कक्षाओं के लिए स्कूल की मांग की। उन्होंने बताया कि नियमों के तहत स्कूल को मंजूरी दी गई थी, लेकिन करीब तीन साल बाद भी उसका निर्माण शुरू नहीं हो पाया। दिव्या ने सवाल उठाया कि जब पैसा, नियम और मंजूरी उपलब्ध थी तो काम क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे मामलों का हिसाब चाहिए, जहां बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी जरूरतें वर्षों तक लंबित रहती हैं।
जमीन के पट्टे का भी सुनाया अनुभव
पूर्व IAS अधिकारी ने अपने विशेष सचिव राजस्व के कार्यकाल का एक और मामला साझा किया। उन्होंने बताया कि एक भूमिहीन व्यक्ति सरकारी जमीन का पट्टा मिलने के बावजूद उस पर कब्जा नहीं पा सका था। दिव्या के अनुसार, मामले की जांच में संबंधित अधिकारी की रिपोर्ट गलत पाई गई। रिपोर्ट वापस कर कार्रवाई की गई, लेकिन इसके बाद भी व्यक्ति को जमीन पर कब्जा दिलाने में अड़चन आई। उन्होंने बताया कि उन्हें फोन पर कहा गया कि "ऊपर से मना किया गया है।" दिव्या ने सवाल उठाया कि आखिर वह "ऊपर" कौन है और आम आदमी को अपने अधिकार के लिए इतना भटकना क्यों पड़ता है।
सड़क, पुल और गड्ढों का मुद्दा भी उठाया
दिव्या मित्तल ने ग्रामीण इलाकों की सड़कों और पुलों की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई गांवों में आज भी सड़क नहीं है, कहीं नदी पर पुल नहीं है और बारिश के मौसम में गांवों का संपर्क मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि जहां सड़कें बनी हैं, वहां भी कई जगह गड्ढे लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। उनके मुताबिक, इन समस्याओं की जानकारी संबंधित लोगों और अधिकारियों को होती है, लेकिन जरूरत कार्रवाई और संवेदनशीलता की है।
पेपर लीक और युवाओं के भविष्य पर उठाए सवाल
दिव्या मित्तल ने युवाओं की शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं पर भी बात की। उन्होंने पेपर लीक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के कारण उनका भविष्य प्रभावित हो जाता है। उन्होंने किसानों और अभिभावकों की चिंता का भी जिक्र किया। दिव्या ने कहा कि कई परिवार अपनी जमीन गिरवी रखकर या जेवर बेचकर बच्चों की पढ़ाई पर पैसा खर्च करते हैं। ऐसे में उनके लिए यह जानना जरूरी है कि बच्चों का भविष्य सुरक्षित है या नहीं।
2013 बैच की IAS अधिकारी रही हैं दिव्या मित्तल
दिव्या मित्तल 2013 बैच की IAS अधिकारी रही हैं। उन्होंने 30 अगस्त को IAS की नौकरी से इस्तीफा दिया था, जिसे 14 सितंबर को मंजूर किया गया। इसके बाद से ही उनके अगले कदम को लेकर चर्चा चल रही थी। दिव्या ने IIT दिल्ली से बीटेक और IIM बेंगलुरु से MBA किया है। इसके बाद उन्होंने लंदन में नौकरी भी की थी। अब उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में उतरने का फैसला सार्वजनिक कर दिया है। दिव्या ने साफ कहा है कि वह किसी राजनीतिक पार्टी के साथ नहीं जुड़ेंगी और अकेले राजनीति में आगे बढ़ेंगी। उनके मुताबिक, उनका उद्देश्य सिर्फ राजनेताओं को बदलना नहीं, बल्कि राजनीति के तौर-तरीकों में बदलाव लाना है।