केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में भोपाल में नगर वन विकास और दुग्ध सहकारिता से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पहल सामने आईं। कार्यक्रम के दौरान मोरवन प्रोजेक्ट के तहत भोपाल में नगर वन विकसित करने के लिए KRIBHCO और मध्यप्रदेश राज्य जैवविविधता बोर्ड के बीच एमओयू का आदान-प्रदान हुआ। वहीं, राज्य स्तरीय गौपालक सम्मेलन में प्रदेश में सहकारिता और दुग्ध क्षेत्र के विस्तार को लेकर सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी दी गई।

मोरवन प्रोजेक्ट के तहत भोपाल में विकसित होगा नगर वन
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में KRIBHCO और मध्यप्रदेश राज्य जैवविविधता बोर्ड के बीच नगर वन विकास के लिए एमओयू हुआ। मध्यप्रदेश जैवविविधता बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी सुदीप सिंह और KRIBHCO के एमडी एस.एस. यादव ने समझौते का आदान-प्रदान किया। इस एमओयू के तहत मोरवन प्रोजेक्ट के अंतर्गत भोपाल में नगर वन विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य शहर के हरित क्षेत्र का विस्तार करने के साथ जैवविविधता का संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन करना है। नगर वन के माध्यम से स्थानीय जैवविविधता और वनस्पतियों को संरक्षण मिलेगा।
हरित क्षेत्र बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
नगर वन परियोजना के जरिए भोपाल में हरित आवरण बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य शहरवासियों को स्वच्छ, हरित और प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर पेड़-पौधों और जैवविविधता के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल शहरी क्षेत्र में पर्यावरण को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखी जा रही है।
1700 से अधिक दुग्ध सहकारी समितियों का गठन
राज्य स्तरीय गौपालक सम्मेलन में सहकारिता के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया। कार्यक्रम में कहा गया कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने देश में सहकारिता को नई दिशा दी है और उनके मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में भी सहकारिता के क्षेत्र में बदलाव आया है। प्रदेश में दुग्ध क्रांति की शुरुआत करते हुए अब तक 1700 से अधिक दुग्ध सहकारी समितियां बनाई जा चुकी हैं। सांची और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के बीच हुए एमओयू के बाद प्रदेश में दूध का कलेक्शन बढ़कर 12 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गया है। इससे गौपालकों को दूध के लिए अब 8.50 रुपये प्रति लीटर अधिक दाम मिल रहा है। सरकार का कहना है कि दूध उत्पादन बढ़ने से किसानों और गौपालकों की आय में भी वृद्धि हो रही है।
दूध से आय और रोजगार बढ़ाने का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य है कि दूध के माध्यम से किसानों की आय बढ़े, गोबर से खाद तैयार हो और सरकारी सहयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। इसी दिशा में आने वाले वर्षों में प्रदेश में दूध का कलेक्शन बढ़ाकर 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया है। मध्यप्रदेश में दूध से आय आधारित अर्थव्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे दुग्ध उत्पादन से जुड़े किसानों और गौपालकों को आर्थिक लाभ मिलने के साथ प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।