राज्य स्तरीय गौपालक सम्मेलन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा गौपालकों और दुग्ध उत्पादकों के हित में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि सम्मेलन में बड़ी संख्या में गौपालकों की मौजूदगी प्रदेश में श्वेत क्रांति के लिए शुभ संकेत है। उन्होंने कहा कि नई डेयरी समितियां बनाने के लक्ष्य में मध्यप्रदेश की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है। श्री शाह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को भरोसा दिलाया कि दूध उत्पादन बढ़ाने के लक्ष्य को हासिल करने में केंद्र सरकार हर कदम पर मध्यप्रदेश के साथ खड़ी रहेगी।
सहकारिता से दुग्ध उत्पादकों को मिलेगा सीधा लाभ
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि लंबे समय से सहकारिता से जुड़े लोग अलग सहकारिता मंत्रालय की मांग करते रहे थे। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार देश में सहकारिता मंत्रालय का गठन हुआ। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा लाभ गौपालकों और दुग्ध उत्पादकों को मिलेगा। श्री शाह के अनुसार बिचौलियों के माध्यम से दूध बेचने पर उत्पादकों को करीब 35 रुपये प्रति लीटर मिलते हैं, जबकि सहकारी समितियों के माध्यम से उन्हें 55 रुपये प्रति लीटर तक का भाव दिलाने की व्यवस्था की जा रही है। सरकार दूध से दही, मक्खन, पनीर और अन्य उत्पाद तैयार करने के लिए पूरा डेयरी इकोसिस्टम विकसित कर रही है।

डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मिल रहा विस्तार
मध्यप्रदेश में डेयरी क्षेत्र से जुड़ी कई परियोजनाओं का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि उज्जैन में 255 करोड़ रुपये की लागत से दूध प्रसंस्करण संयंत्र का भूमिपूजन किया गया है। भोपाल में 17 करोड़ रुपये की लागत से सांची दुग्ध संघ का संयंत्र तैयार किया गया है, जबकि करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक राज्यस्तरीय प्रयोगशाला बनाई गई है। शिवपुरी में 6.5 करोड़ रुपये की लागत से मिनी डेयरी यूनिट विकसित की जाएगी। इसके अलावा भोपाल और इंदौर दुग्ध संघ से जुड़े पशुपालकों को 12 करोड़ रुपये का बोनस दिया गया और गौपालक दीदियों को सम्मानित किया गया। श्री शाह ने बताया कि प्रदेश में 50 एकड़ भूमि पर गाय और भैंस की नस्ल सुधार कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। नस्ल सुधार के माध्यम से पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार और दूध उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। नई प्रजनन तकनीकों के जरिए बछिया के जन्म की संभावना बढ़ाने का भी लक्ष्य रखा गया है।
तीन साल में दूध उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने अगले तीन वर्षों में दूध उत्पादन को 10 लाख लीटर से बढ़ाकर 50 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने माना कि यह बड़ा लक्ष्य है, लेकिन गुजरात के अनुभव से इसे हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 तक देश में दूध उत्पादन करीब 14.07 करोड़ टन था, जो पिछले वर्षों में बढ़कर 25 करोड़ टन से अधिक हो गया है। भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है। प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में भी 58 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह करीब 485 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन हो गई है। केंद्र सरकार ने गांवों में 75 हजार नई डेयरी सहकारी समितियां बनाने और 46 हजार मौजूदा डेयरियों को मजबूत करने का लक्ष्य रखा है। श्री शाह ने कहा कि इस अभियान में मध्यप्रदेश की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
श्वेत क्रांति के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा
श्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार पशुओं की नस्ल सुधार, पशु आहार, चारा प्रबंधन और कृत्रिम गर्भाधान जैसे क्षेत्रों पर काम कर रही है। गोबर से बायोगैस और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करने के लिए भी मॉडल विकसित किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा के साथ ग्रामीण रोजगार और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि डेयरी आधारित अर्थव्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त होने का अवसर मिल रहा है। साथ ही कुपोषण से लड़ाई में भी डेयरी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत के डेयरी उत्पादों का निर्यात बढ़कर करीब 5,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और कई देशों में भारतीय डेयरी उत्पाद भेजे जा रहे हैं। सम्मेलन में न्याय संहिता प्रदर्शनी का भी शुभारंभ किया गया। श्री शाह ने भारतीय न्याय संहिता में ऑनलाइन एफआईआर, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और वैज्ञानिक साक्ष्यों के उपयोग जैसी व्यवस्थाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नई न्याय व्यवस्था का मूलमंत्र ‘न्याय’ है।
केंद्रीय मंत्री ने मध्यप्रदेश को नशा मुक्त बनाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया और कहा कि लक्ष्य 31 दिसंबर 2029 से पहले प्रदेश को नशा मुक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति के जरिए युवाओं को नई दिशा देने का प्रयास किया जाएगा। अंत में उन्होंने गौपालकों को बधाई देते हुए कहा कि 50 लाख लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन का लक्ष्य कठिन जरूर है, लेकिन केंद्र सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने में मध्यप्रदेश के साथ खड़ी है।