भोपाल की लोअर लेक में रोज करीब 8 एमएलडी अनुपचारित सीवेज पहुंचने का मामला सामने आया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण की सेंट्रल जोन पीठ में हुई सुनवाई के दौरान रिपोर्ट में बताया गया कि 37 नालों को एसटीपी की ओर मोड़ने के बावजूद दो नालों से गंदा पानी सीधे झील में जा रहा है। इनमें बाणगंगा नाले से करीब 6 एमएलडी और पुराने मछली घर के पास बाणगंगा नाला क्षेत्र से करीब 2 एमएलडी सीवेज आने की बात कही गई है। मामला राशिद नूर खान बनाम कलेक्टर, भोपाल एवं अन्य के रूप में चल रहा है।
21 महीने में 2.10 करोड़ की गणना
मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आकलन भी किया गया है। इसमें 31 मार्च 2026 से 31 दिसंबर 2027 तक 21 महीने की अवधि को आधार बनाया गया। अधिकरण के पूर्व आदेशों के अनुसार प्रति नाला प्रति माह 5 लाख रुपये की दर से गणना की गई। दो नालों के हिसाब से 21 महीने की राशि 2.10 करोड़ रुपये बैठती है। हालांकि यह अंतिम क्षतिपूर्ति नहीं है। वास्तविक अवधि, उपचार व्यवस्था और अन्य तथ्यों के सत्यापन के बाद अंतिम राशि तय होगी।
10 एमएलडी एसटीपी का काम शुरू
नगर निगम ने बताया कि दोनों स्रोतों से आने वाले सीवेज के उपचार के लिए 10 एमएलडी क्षमता के एसटीपी का काम 11 सितंबर 2026 से शुरू किया गया है। इसे 31 दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। हालांकि सुनवाई में यह सवाल भी महत्वपूर्ण रहा कि एसटीपी बनने तक रोज झील में पहुंच रहे करीब 80 लाख लीटर अनुपचारित पानी को रोकने की तत्काल व्यवस्था क्या है।
पीएचई प्रमुख सचिव को बनाया पक्षकार
सीवेज उपचार और झील के रखरखाव में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की भूमिका सामने आने पर एनजीटी ने विभाग के प्रमुख सचिव को मामले में आवश्यक पक्षकार बनाया है। विभाग को 15 दिन में जवाब और कार्रवाई रिपोर्ट पेश करनी होगी। नगर निगम को भी वेटलैंड की सुरक्षा, अनुपचारित पानी के प्रवाह को रोकने और अवैध निर्माण हटाने को लेकर जवाब देना होगा।
वेटलैंड में निर्माण पर भी सख्ती
सुनवाई के दौरान लोअर लेक के वेटलैंड क्षेत्र में विभिन्न निर्माणों का मुद्दा भी उठाया गया। अधिकरण ने संबंधित पक्षों को जवाब और आपत्ति दाखिल करने का अवसर दिया है। साथ ही वेटलैंड के भीतर किसी भी अनधिकृत निर्माण को रोकने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली कार्रवाई में सीवेज रोकने, झील की सुरक्षा और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति से जुड़े कदमों की स्थिति स्पष्ट होगी।