भोपाल: बोरवेल पर बैन, नियम तोड़ा तो दो साल की सजा

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भोपाल: बोरवेल पर बैन, नियम तोड़ा तो दो साल की सजा

भोपाल बोरवेल पर बैन नियम तोड़ा तो दो साल की सजा

Bhopal water crisis: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बढ़ते भूजल संकट को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिला कलेक्टर ने पूरे जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है। इसके साथ ही जिले में निजी ट्यूबवेल और बोरवेल खनन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है.प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। दोषी पाए जाने पर दो साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।

Bhopal water crisis: बोरिंग मशीनों के प्रवेश पर भी रोक

अवैध बोरिंग को रोकने के लिए प्रशासन ने जिले की सीमा से बोरवेल मशीनों के गुजरने पर भी रोक लगा दी है। यदि कोई मशीन बिना अनुमति जिले में प्रवेश करती पाई जाती है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।प्रशासन के अनुसार आदेश का उल्लंघन करने पर दो हजार रुपये तक का जुर्माना, दो साल की सजा या दोनों का प्रावधान लागू होगा।

Bhopal water crisis: बिना अनुमति नलकूप खुदाई बैन

जारी आदेश के अनुसार अब जिले में प्रशासनिक अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति ट्यूबवेल या नलकूप की खुदाई नहीं करा सकेगा। यदि कहीं अवैध रूप से बोरिंग कराई जाती है तो संबंधित एसडीएम और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचकर मशीन जब्त करेंगे और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।

सूखा राहत नियंत्रण सेल का गठन

गर्मी के मौसम में संभावित पेयजल संकट को देखते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHED) ने एक सूखा राहत नियंत्रण सेल भी बनाया है। यह नियंत्रण कक्ष 30 जून 2026 तक संचालित रहेगा। नियंत्रण कक्ष दो पालियों में काम करेगा: सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक, दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक,इसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आने वाली पेयजल संबंधी शिकायतों का तत्काल समाधान करना है।

भूजल स्तर लगातार गिर रहा

विशेषज्ञों के अनुसार भोपाल जिले में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। Central Water Commission की रिपोर्ट के मुताबिक जिला पहले ही सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में शामिल किया जा चुका है.भोपाल जिले के तीन क्षेत्र विशेष रूप से चिंताजनक स्थिति में हैं रिपोर्ट के अनुसार इन क्षेत्रों में पानी का स्तर 80 से 150 फीट तक नीचे चला गया है। कई स्थानों पर हैंडपंप भी बंद होने लगे हैं।

भूजल संकट को लेकर की पहल

भोपाल में भूजल संकट की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। निजी बोरवेल और नलकूप पर प्रतिबंध के साथ निगरानी भी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते भूजल संरक्षण के उपाय नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में पेयजल संकट और गहरा सकता है।

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