मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा जनजाति बहुल इलाकों में हाल ही में बीमारी के चलते बच्चों की मौत की घटनाओं ने शासन-प्रशासन का ध्यान खींचा है। सुदूर वनांचल में स्वास्थ्य सुविधाओं और जागरूकता की कमी इस संकट की बड़ी वजहों में सामने आई है। इन घटनाओं के बाद सरकार ने क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने और लोगों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया है।

झाड़-फूंक बनी बड़ी चुनौती
बैगा बहुल कई गांवों में गंभीर बीमारी होने पर भी कुछ परिवार अस्पताल जाने के बजाय झाड़-फूंक और पारंपरिक उपचार का सहारा लेते हैं। स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी के कारण कई बार बीमारी की शुरुआती स्थिति में इलाज नहीं मिल पाता और समस्या गंभीर हो जाती है। लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहे इन दूरदराज इलाकों में शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी की कमी भी चुनौती बनी हुई है।
दवाइयों को लेकर भ्रांतियां
स्वास्थ्य विभाग की ओर से वितरित की जाने वाली जरूरी और निवारक दवाइयों को लेकर भी कई परिवारों में भ्रम देखने को मिलता है। उचित संवाद और जानकारी के अभाव में कुछ लोग दवाइयों का सेवन नहीं करते या उन्हें फेंक देते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य अमले के सामने इलाज के साथ-साथ लोगों का भरोसा जीतने और सही जानकारी पहुंचाने की भी चुनौती है।

CM ने संभाला मोर्चा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट के बैगा बहुल गांवों, जैसे बोंदारी और कोरका, का दौरा कर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने जमीन पर बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और प्रशासन को तत्काल जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए प्रत्येक परिवार को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
225 करोड़ का विकास पैकेज
सरकार ने बैगा बहुल क्षेत्र के 100 गांवों के समग्र विकास के लिए 225 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी है। इसके तहत सड़क, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही गांवों में चिकित्सा कैंप लगाने और स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लोगों को समय पर इलाज मिले और झाड़-फूंक जैसी कुप्रथाओं पर रोक लग सके।