अंबिकापुर के बहुचर्चित अक्षत अग्रवाल हत्याकांड में अदालत ने करीब दो साल बाद बड़ा फैसला सुनाया है। सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज की अदालत ने अंबिका स्टील के पूर्व कर्मचारी संजीव मंडल उर्फ भानू बंगाली को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आर्म्स एक्ट की धारा 25-27 के तहत आरोपी को 5 साल के कारावास की सजा भी दी गई।
20 अगस्त 2024 को हुई थी हत्या
मामला 20 अगस्त 2024 का है। अंबिका स्टील के संचालक महेश केडिया के 23 वर्षीय बेटे अक्षत अग्रवाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अगले दिन 21 अगस्त को उसका शव शहर से लगे चठिरमा जंगल में उसकी ही कार से बरामद हुआ था। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
शरीर पर मिले थे तीन गोली के निशान
जांच के दौरान अक्षत के शरीर पर गोली लगने के तीन निशान मिले थे। पुलिस ने मामले में अंबिका स्टील के पूर्व कर्मचारी संजीव मंडल को गिरफ्तार किया। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने तीन पिस्टल और 31 कारतूस बरामद किए थे। इसके अलावा 50 हजार रुपये नकद और अक्षत की सोने की चेन, ब्रेसलेट व अंगूठी भी बरामद की गई थी।
आरोपी के दावे से मचा था हड़कंप
गिरफ्तारी के बाद संजीव मंडल ने दावा किया था कि अक्षत ने खुद उसकी हत्या की सुपारी दी थी। आरोपी के मुताबिक, घटना के दौरान अक्षत कार की ड्राइविंग सीट पर था और गोली चलने के बाद उसने दो और फायर किए। हालांकि, अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को हत्या का दोषी माना गया।
नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट भी हुआ
मामले की जांच के दौरान आरोपी का नार्को टेस्ट, पॉलीग्राफ टेस्ट और ब्रेन मैपिंग भी कराया गया था। जांच में घटनास्थल पर आरोपी और मृतक के अलावा किसी तीसरे व्यक्ति की मौजूदगी की पुष्टि नहीं हुई।
33 गवाहों के बयान बने आधार
करीब दो साल चली सुनवाई में पुलिस अधिकारियों, जवानों, फॉरेंसिक विशेषज्ञों, डॉक्टरों, परिजनों और दोस्तों समेत 33 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने संजीव मंडल को BNS की धारा 103(1) के तहत उम्रकैद और आर्म्स एक्ट के तहत 5 साल की सजा सुनाई। आरोपी करीब दो साल से जेल में बंद है।