इंदौर हत्याकांड में 6 को उम्रकैद

इंदौर में 7 साल पुराने हत्याकांड का फैसला, 6 आरोपियों को उम्रकैद

इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में सात साल पहले हुए हत्याकांड में अदालत ने छह आरोपियों को उम्रकैद सहित अन्य सजाएं सुनाईं।

By : दिव्या मिस्त्री
इंदौर में 7 साल पुराने हत्याकांड का फैसला, 6 आरोपियों को उम्रकैद

इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में करीब सात साल पहले हुए सनसनीखेज हत्याकांड में अदालत ने छह आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। नवम अपर सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार चंदेल की अदालत ने हत्या के साथ शव को ठिकाने लगाने और साक्ष्य मिटाने के मामले में भी सभी आरोपियों को 7-7 साल के सश्रम कारावास से दंडित किया।

बगीचे के पास मिला था अज्ञात शव

24 दिसंबर 2019 की सुबह अम्बिकापुरी कॉलोनी के बगीचे के पास एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला था। मृतक के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे। उसके मुंह और नाक पर लाल दुपट्टा बंधा था, जबकि हाथ प्लास्टिक की पट्टी से बंधे हुए थे। पुलिस को आशंका हुई कि हत्या कहीं और करने के बाद शव यहां फेंका गया।

एक दिन बाद हुई मृतक की पहचान

पुलिस ने शव की पहचान के प्रयास शुरू किए। अगले दिन मृतक की पहचान 33 वर्षीय इंदर वर्मा के रूप में उसकी पत्नी सीमा वर्मा ने की। इसके बाद पुलिस ने हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

पुरानी रंजिश बनी हत्या की वजह

जांच में सामने आया कि इंदर वर्मा का कुछ लोगों से पुराना विवाद था। अभियोजन के अनुसार, 23 दिसंबर की रात उसे विवाद सुलझाने के नाम पर बुलाया गया था। वहां विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने कथित तौर पर डंडों और चाकू से हमला कर दिया। इंदर के बेहोश होने के बाद आरोपियों ने उसे मृत समझकर शव ठिकाने लगाने की योजना बनाई।

एक्टिवा पर रखकर शव फेंकने का आरोप

अभियोजन के मुताबिक, आरोपियों ने इंदर के हाथ बांधे और मुंह व गले पर दुपट्टा बांध दिया। इसके बाद शव को एक्टिवा पर रखकर सुनसान स्थान पर फेंक दिया गया। जांच में पुलिस ने CCTV फुटेज समेत अन्य साक्ष्य जुटाए और आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में अभियोग-पत्र पेश किया।

छह आरोपियों को उम्रकैद की सजा

अदालत ने संगीता पति गब्बर गौड़, रोहित उर्फ लालू, राजेश बौरासी, बबलू मालवीय, अजय उर्फ कालू भोई और करण उर्फ भूरी को दोषी पाया। सभी को हत्या के मामले में आजीवन कारावास और शव ठिकाने लगाने व साक्ष्य मिटाने के मामले में 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुरेंद्र सिंह वास्केल ने पैरवी की।

सात साल बाद आया फैसला

पुरानी रंजिश से शुरू हुआ विवाद हत्या और शव को ठिकाने लगाने तक पहुंच गया। करीब सात साल बाद आए इस फैसले में अदालत ने हत्या के साथ साक्ष्य मिटाने और शव ठिकाने लगाने के अपराध को भी गंभीरता से लिया और दोषियों को कठोर सजा सुनाई।

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