श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात करने वाले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के दो सदस्यों से स्पष्टीकरण मांगा है। कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज के आदेश के बाद SGPC सदस्य मिट्ठू सिंह कानेके और जसवंत सिंह पुड़ैण को 10 दिन के भीतर व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।
दोनों सदस्यों पर फिलहाल SGPC की बैठकों में शामिल होने पर भी रोक लगा दी गई है। श्री अकाल तख्त साहिब के इस निर्देश के बाद मामला सिख धार्मिक संस्थाओं और राजनीतिक नेतृत्व के बीच संबंधों को लेकर चर्चा में आ गया है।
मुख्यमंत्री से मुलाकात पर उठे सवाल
जानकारी के मुताबिक, मिट्ठू सिंह कानेके और जसवंत सिंह पुड़ैण ने हाल ही में मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात की थी। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई, जब श्री अकाल तख्त साहिब पहले ही मुख्यमंत्री मान को लेकर एक कड़ा आदेश जारी कर चुका था।
15 जून को श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से भगवंत मान को ‘गुरु दोखी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित किया गया था। साथ ही संगत को मुख्यमंत्री से दूरी बनाए रखने का निर्देश दिया गया था। ऐसे में दोनों SGPC सदस्यों की मुख्यमंत्री से मुलाकात पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
10 दिन में व्यक्तिगत पेशी का निर्देश
कार्यकारी जत्थेदार के आदेश के अनुसार दोनों SGPC सदस्यों को निर्धारित 10 दिनों की अवधि के भीतर श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। उन्हें यह बताना होगा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से किन परिस्थितियों में मुलाकात की और इसके पीछे उनका उद्देश्य क्या था।
श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देश में दोनों सदस्यों के SGPC की बैठकों में हिस्सा लेने पर भी पाबंदी लगाई गई है। यानी स्पष्टीकरण दिए जाने और मामले में आगे का निर्णय होने तक वे समिति की बैठकों में शामिल नहीं हो सकेंगे।
अब इस पूरे मामले में दोनों सदस्यों के स्पष्टीकरण पर नजर रहेगी। उनके जवाब के आधार पर श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल, मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात और उस पर मांगे गए स्पष्टीकरण ने SGPC के भीतर भी इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण बना दिया है।