मार्केट रिपोर्ट : सेंसेक्स, निफ्टी ने अस्थिर जुलाई को मज़बूती के साथ किया समाप्त; बिग टेक नतीजों से एआई तेज़ी लौटने पर कोस्पी में ऐतिहासिक 18% उछाल; सोना स्थिर, रुपया मज़बूत
माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न के शानदार नतीजों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ट्रेड को फिर से जीवंत कर दिया और दक्षिण कोरिया में शेयर बाज़ार के इतिहास की सबसे तेज़ एकल-दिवसीय रिकवरी को जन्म दिया, जिसके साथ वैश्विक बाज़ारों ने असाधारण रूप से उतार-चढ़ाव भरे जुलाई महीने को मज़बूती के साथ समाप्त किया। भारतीय बेंचमार्क ने विदेशी निवेशकों की वापसी और कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ गिरावट के सहारे अस्थिर महीने को ठोस साप्ताहिक बढ़त के साथ समाप्त किया।
भारतीय बाज़ार : एफआईआई खरीदारी, कच्चे तेल में नरमी से सेंसेक्स, निफ्टी की मज़बूत साप्ताहिक बढ़त
बीएसई सेंसेक्स शुक्रवार के सत्र में 166.49 अंक या 0.21% चढ़कर 78,094.64 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50, 66.45 अंक (0.27%) की बढ़त के साथ 24,383.60 पर बंद हुआ, जो लगातार तीसरे सत्र की तेज़ी है। ऑटो और वित्तीय सेवाओं के शेयरों ने बढ़त की अगुवाई की, जिसमें बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, इटरनल, श्रीराम फाइनेंस और जियो फाइनेंशियल निफ्टी के शीर्ष लाभार्थियों में शामिल रहे, जबकि आईटी दिग्गज इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज़, टेक महिंद्रा और विप्रो पीछे रहे, जिससे निफ्टी आईटी की पांच-दिवसीय तेज़ी की लकीर थम गई।
साप्ताहिक आधार पर, सेंसेक्स करीब 2,035 अंक या लगभग 2.68% उछला, जबकि निफ्टी लगभग 616 अंक या करीब 2.59% चढ़ा, जिससे पिछले सप्ताह की पूरी गिरावट की भरपाई हो गई। इस तेज़ी को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की मज़बूत वापसी का सहारा मिला — सप्ताह के अंतिम तीन सत्रों में एफआईआई ने कुल मिलाकर ₹7,360 करोड़ से अधिक की इक्विटी खरीदारी की — भले ही घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) अंतिम दिन हल्के विक्रेता बने रहे। सप्ताह भर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ गिरावट से भी सेंटीमेंट को बल मिला, क्योंकि मध्य-पूर्व में शिपिंग व्यवधान कम होने से प्रभावित क्षेत्रों से अधिक टैंकरों को गुज़रने की अनुमति मिली, साथ ही वॉल स्ट्रीट में जोरदार तेज़ी के बाद व्यापक रूप से सकारात्मक वैश्विक संकेत भी मिले।
एशियाई बाज़ार : भारी गिरावट के बाद कोस्पी में रिकॉर्ड 18% की रिकवरी
एशियाई बाज़ारों ने हाल के स्मरण में सबसे नाटकीय सप्ताहों में से एक पेश किया, जिसका केंद्र दक्षिण कोरिया का शेयर एक्सचेंज रहा। कोस्पी तीन भयावह सत्रों (27-29 जुलाई) में 17% से अधिक टूटा, जिससे 28 और 29 जुलाई को लगातार सर्किट ब्रेकर लागू हुए — एक्सचेंज के इतिहास में पहली बार ऐसे लगातार ट्रेडिंग रोक — क्योंकि सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स से जुड़े खुदरा मार्जिन कर्ज़ और सिंगल-स्टॉक लीवरेज्ड ईटीएफ की एक "त्रि-स्तरीय" लीवरेज संरचना हिंसक रूप से बिखर गई, जिससे सूचकांक इंट्राडे में 5,262.77 के निचले स्तर तक लुढ़क गया।
फिर, शुक्रवार को, कोस्पी ने अपने इतिहास की सबसे बड़ी रिकवरी दर्ज की, जो रिकॉर्ड 17.91% — 1,001.89 अंक — उछलकर 6,595.45 पर बंद हुआ, जिसने 2008 के वित्तीय संकट के दौरान बने पिछले 11.95% के रिकॉर्ड को आराम से पीछे छोड़ दिया। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स 26.81% उछला और एसके हाइनिक्स 29.95% चढ़ा, जो 17 वर्षों में पहली बार अपनी दैनिक ऊपरी ट्रेडिंग सीमा को छू गया, यह तब हुआ जब माइक्रोसॉफ्ट के शानदार नतीजों ने एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर खर्च को लेकर चिंताओं को कम कर दिया। इस ऐतिहासिक एकल-दिवसीय उछाल के बावजूद, कोस्पी जुलाई महीने को करीब 22% की गिरावट के साथ समाप्त करने वाला रहा — 1997 के एशियाई वित्तीय संकट के बाद इसका सबसे बुरा मासिक प्रदर्शन।
क्षेत्र में अन्यत्र, जापान का निक्केई 225 शुक्रवार को 4.03% उछलकर 64,362.02 पर पहुंचा, हालांकि यह पिछले शुक्रवार के मुकाबले साप्ताहिक आधार पर लगभग सपाट रहा। हांगकांग का हैंग सेंग शुक्रवार को 0.10% चढ़कर 25,884.43 पर, यानी सप्ताह भर में करीब 3.7% ऊपर रहा, जबकि चीन का शंघाई कंपोज़िट 0.72% चढ़कर 3,832.26 पर, यानी सप्ताह भर में लगभग 0.5% ऊपर रहा। इसके बावजूद, चीन का टेक-केंद्रित स्टार 50 सूचकांक अपने अब तक के सबसे बुरे मासिक प्रदर्शन के साथ बंद हुआ, जो यह दर्शाता है कि एआई-प्रेरित अस्थिरता पूरे क्षेत्र में कितनी असमान रही है।
अमेरिकी बाज़ार : माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न के शानदार नतीजों से वॉल स्ट्रीट की गिरावट की लकीर थमी
अमेरिकी शेयर बाज़ारों ने तीन सप्ताह में अपना पहला जीत वाला सप्ताह दर्ज किया, जिसे बिग टेक के शानदार नतीजों का बल मिला। एसएंडपी 500 शुक्रवार को 0.7% चढ़कर 7,489.72 पर बंद हुआ, नैस्डैक कंपोज़िट 1% उछलकर 25,373.85 पर पहुंचा, और डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 276.97 अंक या 0.53% चढ़कर 52,485.03 पर बंद हुआ, क्योंकि अमेज़न के शेयर उसके ई-कॉमर्स और क्लाउड कारोबार के अनुमानों से बेहतर प्रदर्शन के बाद उछल गए।
यह तेज़ी गुरुवार को माइक्रोसॉफ्ट के ऐतिहासिक 15% के एकल-दिवसीय शेयर उछाल के बाद आई — जो 2008 के बाद उसका सबसे बड़ा एक-दिवसीय लाभ है — क्योंकि उसके एज़्योर क्लाउड कारोबार ने पहली बार $100 अरब की वार्षिक राजस्व सीमा पार कर ली, जिससे इस चिंता को कम किया कि भारी एआई पूंजीगत खर्च का फल नहीं मिल रहा। अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और अल्फाबेट ने सामूहिक रूप से 2026 के लिए $720-745 अरब के पूंजीगत व्यय का मार्गदर्शन दिया, जिससे निवेशकों को राहत मिली, भले ही मेटा के शेयर करीब 8% गिरे और एप्पल निराशाजनक मार्गदर्शन के चलते 7% टूटा। यह रिकवरी मध्य-पूर्व तनाव की निरंतर पृष्ठभूमि और 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में 2007 के बाद के उच्चतम स्तर तक तेज़ उछाल के बावजूद हुई।
कच्चा तेल : $100+ के उच्च स्तर को छूने के बाद ब्रेंट क्रूड करीब $90 पर वापस आया
पिछले सप्ताह $100 प्रति बैरल के पार जाने के बाद इस सप्ताह तेल बाज़ार में उल्लेखनीय नरमी आई। शुक्रवार तक ब्रेंट क्रूड लगभग $90 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड $85-88 प्रति बैरल के आसपास रहा, क्योंकि लाल सागर में शिपिंग व्यवधान कम होने और ईरान संघर्ष में आंशिक डी-एस्केलेशन के संकेतों ने पहले प्रभावित मार्गों से अधिक टैंकरों को गुज़रने की अनुमति दी। हालांकि, ईरान से जुड़ी ताज़ा रिपोर्टों के बाद शुक्रवार को तेल कीमतों में मामूली तेज़ी आई, जो यह दर्शाता है कि यदि तनाव फिर से भड़कता है तो सेंटीमेंट कितनी तेज़ी से पलट सकता है।
आज भारत में सोने और चांदी के भाव
जुलाई महीने के समापन पर भारत में सोना काफी हद तक स्थिर रहा, यह उस अस्थिर महीने के बाद हुआ जिसमें दोनों धातुओं में तेज़ गिरावट के बाद अधिकांश नुकसान की भरपाई हो गई। आज की स्थिति के अनुसार:
- 24 कैरेट सोना: लगभग ₹14,460 प्रति ग्राम (करीब ₹1,44,050-1,44,950 प्रति 10 ग्राम)
- 22 कैरेट सोना: लगभग ₹13,255 प्रति ग्राम
- 18 कैरेट सोना: लगभग ₹10,845 प्रति ग्राम
- चांदी: लगभग ₹2,19,000-2,35,000 प्रति किलोग्राम (करीब ₹219-235 प्रति ग्राम), स्रोतों के अनुसार कुछ इंट्राडे अंतर के साथ
स्थानीय करों और मेकिंग चार्ज के कारण कीमतें शहर-दर-शहर भिन्न होती हैं, जिनमें दिल्ली आमतौर पर सबसे ऊंची दरों में शामिल रहता है। इन आंकड़ों में जीएसटी और अन्य लागू शुल्क शामिल नहीं हैं — इस सप्ताह चांदी में आए तीव्र उतार-चढ़ाव को देखते हुए, प्रकाशन से पहले लाइव दर की जांच करना उचित रहेगा।
रुपया और मुद्रा बाज़ार
भारतीय रिज़र्व बैंक के लगातार हस्तक्षेप और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के सहारे इस सप्ताह रुपये में ठोस रिकवरी देखी गई। USD/INR शुक्रवार तक घटकर लगभग ₹95.4-95.7 पर आ गया — रुपये के लिए करीब तीन सप्ताह का उच्चतम स्तर — जबकि सप्ताह की शुरुआत में यह ₹96.9 के करीब के कमज़ोर स्तरों को छू चुका था।
अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले रुपया लगभग निम्नलिखित स्तरों पर रहा:
- 1 अमेरिकी डॉलर (USD) ≈ ₹95.5
- 1 यूरो (EUR) ≈ ₹109.6
- 1 ब्रिटिश पाउंड (GBP) ≈ ₹128.9
- 100 जापानी येन (JPY) ≈ ₹60.4
आगे की दिशा
एआई-संबंधित पूंजीगत खर्च के फिर से पसंदीदा बनने और कच्चे तेल की कीमतों के हाल के उच्च स्तरों से नीचे आने के साथ, अगले सप्ताह के लिए सेंटीमेंट सिर्फ सात दिन पहले की तुलना में काफी बेहतर नज़र आता है। हालांकि, दक्षिण कोरिया में लीवरेज्ड ईटीएफ को लेकर आई उथल-पुथल एक याद दिलाती है कि एआई-प्रेरित तेज़ी सतह के नीचे कितनी नाज़ुक बनी हुई है, जबकि ईरान संघर्ष में किसी भी नए भड़काव से इस सप्ताह की तेल और मुद्रा बाज़ारों में मिली राहत तेज़ी से पलट सकती है। निवेशकों की नज़र भारत में जारी पहली तिमाही के नतीजों, वैश्विक स्तर पर आगे आने वाले बिग टेक नतीजों, और मध्य-पूर्व मोर्चे पर किसी भी नए घटनाक्रम पर आने वाले दिनों के लिए संकेतों हेतु रहेगी।
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*नोट: सोना, चांदी, मुद्रा और कच्चे तेल के इंट्राडे भाव कारोबारी सत्र के दौरान बदलते रहते हैं — उपरोक्त आंकड़े शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 तक रिपोर्ट किए गए भावों को दर्शाते हैं और प्रकाशन से पहले किसी लाइव स्रोत से सत्यापित कर लिए जाएं, विशेष रूप से समय-संवेदनशील आंकड़ों के लिए।*