झारखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े बड़गाईं जमीन मामले में विशेष पीएमएलए अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। रांची के बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अदालत ने 30 सितंबर को सोरेन के खिलाफ आरोप तय किए। इसके साथ ही मामले के ट्रायल का रास्ता साफ हो गया है। सोरेन ने अदालत में अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद और गलत बताया है।
अदालत की कार्रवाई के बाद भाजपा ने मुख्यमंत्री से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की है। दूसरी ओर, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भाजपा के आरोपों पर पलटवार करते हुए विपक्ष से पहले अन्य राजनीतिक मुद्दों पर जवाब देने को कहा है।
BJP ने उठाया इस्तीफे का मुद्दा
भाजपा की ओर से कहा गया है कि मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए हेमंत सोरेन मामले से जुड़े गवाहों या साक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं। पार्टी ने इसी आधार पर उनके इस्तीफे की मांग की है। हालांकि, यह भाजपा की राजनीतिक मांग है; अदालत द्वारा आरोप तय किया जाना दोषसिद्धि नहीं है और मामले में न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।
मामले में सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुए। विशेष अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद अब अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों और अन्य साक्ष्यों को अदालत के समक्ष पेश किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अगली सुनवाई 30 नवंबर के लिए निर्धारित की गई है।
JMM ने BJP पर किया पलटवार
झामुमो के केंद्रीय उपाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद बैद्यनाथ राम ने भाजपा की इस्तीफे की मांग पर पलटवार किया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाते हुए भाजपा से पहले उनके इस्तीफे की मांग करने को कहा।
बैद्यनाथ राम ने मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि यदि भाजपा इस्तीफे की राजनीति कर रही है तो वह अन्य राज्यों और केंद्र से जुड़े मामलों में भी इसी तरह की मांग क्यों नहीं करती।
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी भी हेमंत सोरेन के समर्थन में सामने आए। उन्होंने भाजपा पर मुख्यमंत्री को निशाना बनाने का आरोप लगाया और कहा कि पहले मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर उठे सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए।
17 आरोपी, सोरेन के खिलाफ आरोप सबसे बाद में तय
इस मामले में कुल 17 लोगों को आरोपी बनाया गया है। हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय होने से पहले अन्य 16 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जा चुके थे।

प्रवर्तन निदेशालय की जांच से जुड़े इस मामले में आरोप है कि बड़गाईं क्षेत्र की जमीन के अधिग्रहण और हस्तांतरण में फर्जी दस्तावेजों और बदले गए भूमि रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया गया। सोरेन ने इन आरोपों से इनकार किया है। अब ट्रायल के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष अपने-अपने साक्ष्य और दलीलें अदालत के सामने रखेंगे।