धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जेन-जी यानी नई पीढ़ी हमारे ही बच्चे हैं। उनके मुताबिक, कुछ लोगों ने युवाओं को भटकाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें नजरअंदाज करना किसी भी स्थिति में सही नहीं है। प्रधान ने कहा कि देश के युवाओं के संकल्प और उनकी आकांक्षाओं के सामने शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारियां बहुत छोटी हैं। उन्होंने साफ कहा कि उनके लिए मंत्री का पद जरूरी नहीं था।
PM मोदी से मुलाकात के बाद फैसला
प्रधान ने अपने इस्तीफे के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाकात की और प्रदर्शन कर रहे युवाओं की मांगों को मानने के लिए उनकी मंजूरी मांगी। प्रधानमंत्री उनकी बात से सहमत हुए और इसके बाद युवाओं से बातचीत भी की गई। इसी प्रक्रिया के बाद उन्होंने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया। उन्होंने अपने फैसले को पद छोड़ने के बजाय युवाओं की बात को प्राथमिकता देने से जोड़ते हुए कहा कि उनके लिए पद से ज्यादा महत्वपूर्ण देश की नई पीढ़ी की आकांक्षाएं हैं।
25 जुलाई को दिया था इस्तीफा
NEET पेपर लीक के मुद्दे पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू होने के करीब 35 दिन बाद धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। उनके इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को अतिरिक्त प्रभार के तौर पर दी गई। प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय हुआ जब NEET समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों और विपक्ष की ओर से सरकार पर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे।
पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन में उतरे थे प्रधान

धर्मेंद्र प्रधान का पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन से पुराना रिश्ता रहा है। करीब 29 साल पहले 1997 में ओडिशा में एक पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन में प्रधान भी शामिल हुए थे। बताया जाता है कि इस प्रदर्शन में करीब 1,500 छात्र शामिल हुए थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया था। इस दौरान धर्मेंद्र प्रधान को भी गंभीर चोटें आई थीं और उनके शरीर में कई जगह फ्रैक्चर हुआ था।
इस्तीफे के बाद पहली बार खुलकर बोले प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने पहली बार सार्वजनिक मंच से अपने फैसले की वजह बताई है। उन्होंने अपने बयान में पद से ज्यादा युवाओं की आकांक्षाओं को महत्व देने की बात कही। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चर्चा के बाद ही उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया।