पंजाब में खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। खासकर दूध और दूध से बने उत्पादों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरे राज्यों से घटिया गुणवत्ता वाला पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद पंजाब पहुंचने की बात भी सामने आई है। जांच के दौरान कुछ मामलों में पनीर में खतरनाक रसायनों के इस्तेमाल का भी पता चला। ऐसे खाद्य पदार्थ लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
पांच साल में 32,928 सैंपल की जांच
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच पंजाब में खाद्य पदार्थों के कुल 32,928 सैंपल लिए गए। इनमें 5,491 सैंपल निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। यानी करीब 16.67 फीसदी सैंपल जांच में फेल पाए गए। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर लगातार निगरानी की जरूरत बनी हुई है।
2025-26 में 1,031 सैंपल फेल
वर्ष 2025-26 में खाद्य पदार्थों के 7,809 सैंपल लिए गए थे। इनमें 1,031 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। इस दौरान 723 मामलों में जुर्माना लगाया गया, जबकि 25 मामलों में सजा हुई। इससे पहले 2024-25 में 4,131 सैंपल लिए गए, जिनमें 748 फेल पाए गए। इनमें 333 मामलों में जुर्माना और आठ मामलों में सजा हुई।
पनीर के 43 फीसदी सैंपल फेल
पंजाब में पनीर की गुणवत्ता सबसे ज्यादा चिंता का विषय बनकर सामने आई है। पिछले साल जारी आंकड़ों के अनुसार पनीर के 2,340 सैंपल लिए गए थे। इनमें 1,027 सैंपल फेल पाए गए। यानी करीब 43 फीसदी पनीर के सैंपल निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें 7.09 फीसदी सैंपल स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित पाए गए। विभाग ने इस संबंध में 589 मामले दर्ज किए।
देसी घी के सैंपल में भी गड़बड़ी
देसी घी की गुणवत्ता को लेकर भी जांच में कई सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। कुल 1,160 सैंपल लिए गए थे, जिनमें 183 फेल पाए गए। वहीं 9.83 फीसदी सैंपल असुरक्षित मिले। इस मामले में विभाग की ओर से 73 केस दर्ज किए गए।
दूध के 700 सैंपल जांच में फेल
दूध की गुणवत्ता को लेकर भी आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। पिछले तीन वर्षों में दूध के 2,559 सैंपल लिए गए। इनमें 700 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। वहीं 11 सैंपल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक पाए गए। विभाग ने इन मामलों में 467 केस दर्ज किए हैं। आंकड़े बताते हैं कि मिलावट के खिलाफ लगातार जांच और कार्रवाई की जरूरत बनी हुई है।