भारत सरकार ने फिल्मों के सर्टिफिकेशन से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 16 सितंबर 2026 को नई फिल्म सर्टिफिकेशन गाइडलाइन जारी की, जो 1991 में जारी पुराने दिशानिर्देशों की जगह लेती है। नई गाइडलाइन में क्रिएटिव फ्रीडम और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन, कंटेंट की उम्र आधारित रेटिंग और संवेदनशील विषयों के चित्रण को लेकर नियमों को स्पष्ट किया गया है।
क्रिएटिव फ्रीडम पर जोर
नई गाइडलाइन में कहा गया है कि फिल्म सर्टिफिकेशन के दौरान सामाजिक मूल्यों और जिम्मेदारी का ध्यान रखा जाए, लेकिन इसके नाम पर रचनात्मक स्वतंत्रता को अनावश्यक रूप से सीमित नहीं किया जाना चाहिए। यानी फिल्म की कहानी और कलात्मक अभिव्यक्ति के साथ सामाजिक प्रभाव को भी ध्यान में रखने की बात कही गई है।
हिंसा और अपराध पर नजर
फिल्मों में हिंसा या अपराध का महिमामंडन करने से बचने को कहा गया है। अपराध करने के तरीकों को इतनी विस्तार से दिखाने पर भी रोक है, जिससे दर्शकों को अपराध करने की प्रक्रिया सीखने में मदद मिल सके। बिना कहानी की जरूरत के अत्यधिक हिंसा, क्रूरता और डरावने दृश्यों को लेकर भी सावधानी बरतने के निर्देश हैं।
बच्चों की सुरक्षा
नई गाइडलाइन में बच्चों से जुड़े कंटेंट पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। बच्चों को हिंसा का शिकार, हिंसा करने वाला या जबरन हिंसा का गवाह बनाने वाले दृश्यों को लेकर सख्ती बरतने की बात कही गई है। बच्चों के साथ दुर्व्यवहार के चित्रण को लेकर भी सावधानी के निर्देश दिए गए हैं।
ड्रग्स और स्मोकिंग पर चेतावनी
शराब, ड्रग्स और धूम्रपान के इस्तेमाल को ग्लैमराइज करने वाले कंटेंट से बचने को कहा गया है। खास तौर पर नारकोटिक ड्रग्स या साइकोट्रोपिक पदार्थों के सेवन, इस्तेमाल या तस्करी से जुड़े दृश्यों में निर्धारित एंटी-ड्रग चेतावनी को लेकर प्रावधान किया गया है। यह नई व्यवस्था पुराने नियमों की तुलना में एक स्पष्ट बदलाव के तौर पर सामने आई है।
महिलाओं के चित्रण पर सख्ती
महिलाओं को अपमानित या नीचा दिखाने वाले कंटेंट पर रोक जारी रहेगी। यौन हिंसा को अगर कहानी के लिए दिखाना जरूरी हो, तो उसे ग्राफिक या जरूरत से ज्यादा विस्तृत तरीके से दिखाने से बचना होगा। अश्लीलता, आपत्तिजनक भाषा और डबल मीनिंग डायलॉग को लेकर भी मौजूदा प्रतिबंध बरकरार हैं।
धर्म और समुदायों पर नियम
फिल्मों में किसी धर्म, नस्ल या समुदाय के खिलाफ अपमानजनक शब्दों या दृश्यों को लेकर भी नियम लागू रहेंगे। इसके अलावा सांप्रदायिकता, अंधविश्वास और गैर-वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने वाले कंटेंट पर भी गाइडलाइन के तहत रोक का प्रावधान है।
देश की सुरक्षा का मुद्दा
भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और दूसरे देशों के साथ भारत के संबंधों को प्रभावित करने वाले कंटेंट को लेकर भी प्रतिबंध जारी रहेंगे। मानहानि और अदालत की अवमानना से जुड़े कंटेंट को लेकर भी गाइडलाइन में प्रावधान मौजूद हैं।
उम्र के हिसाब से सर्टिफिकेट
फिल्मों की उम्र आधारित कैटेगरी में U/A 7+, U/A 13+ और U/A 16+ जैसी श्रेणियां शामिल हैं। ये श्रेणियां पूरी तरह नई नहीं हैं और पहले के सर्टिफिकेशन बदलावों में भी शामिल की जा चुकी हैं। नई गाइडलाइन का उद्देश्य फिल्मों के कंटेंट और दर्शकों की उम्र के बीच बेहतर तालमेल पर जोर देना है।
CBFC में 18 सदस्य
सरकार ने 16 सितंबर 2026 को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC का भी पुनर्गठन किया है। नए बोर्ड में 18 सदस्य हैं और यह बोर्ड तीन साल या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, काम करेगा। बोर्ड में प्रीति जिंटा, सुनील शेट्टी, पंकज त्रिपाठी, रूपाली गांगुली, पल्लवी जोशी और प्रसेनजीत चटर्जी समेत 18 सदस्य शामिल हैं।
क्या CBFC फिल्म बैन कर सकता है?
CBFC सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करने वाली वैधानिक संस्था है और फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन से पहले उनका सर्टिफिकेशन करती है। तकनीकी तौर पर CBFC के पास किसी फिल्म पर अलग से ‘बैन’ लगाने की शक्ति नहीं है। हालांकि, यदि कोई फिल्म तय मानकों पर खरी नहीं उतरती है, तो बोर्ड उसे सर्टिफिकेट देने से इनकार कर सकता है। ऐसे में फिल्म का सिनेमाघरों में सार्वजनिक प्रदर्शन संभव नहीं होता।
1991 के नियमों से कितना बदलाव?
नई गाइडलाइन में कई ऐसे प्रावधान हैं जो पुराने 1991 के नियमों में भी मौजूद थे। हिंसा और अपराध का महिमामंडन, बच्चों के साथ हिंसा, जानवरों पर अनावश्यक क्रूरता, ड्रग्स और स्मोकिंग का प्रचार, महिलाओं का अपमानजनक चित्रण, अश्लीलता, धर्म या समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रतिबंध पहले भी दिशानिर्देशों का हिस्सा थे। इसलिए नई गाइडलाइन में सभी नियम पहली बार लागू नहीं हुए हैं। बड़ा बदलाव यह है कि पुराने ढांचे को अपडेट करके मौजूदा सर्टिफिकेशन व्यवस्था के अनुरूप स्पष्ट किया गया है और ड्रग्स से जुड़े दृश्यों पर चेतावनी जैसे प्रावधान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।