दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार ने दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। महिला का दावा है कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के दौरान ACP विवेक भगत ने उनके साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया और धक्का दिया। इस मामले को लेकर पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों में नाराजगी देखी गई।
FIR की मांग को लेकर थाने के बाहर प्रदर्शन
महिला पत्रकार का आरोप है कि शिकायत के बावजूद कई घंटे तक FIR दर्ज नहीं की गई। इसके बाद बड़ी संख्या में पत्रकार पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर जुट गए और FIR दर्ज करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। CJP और AISA की ओर से भी पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
राहुल गांधी ने अमित शाह से मांगा जवाब
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मामले को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन आती है और महिला पत्रकार की शिकायत पर कार्रवाई होनी चाहिए। उनके बयान में पुलिस पर महिला प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी को लेकर भी सवाल उठाए गए।
जंतर-मंतर पर लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन
यह विवाद उस प्रदर्शन के बीच सामने आया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया जा रहा है। शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े मामलों में तीन FIR दर्ज की थीं। पुलिस के मुताबिक, इनमें सार्वजनिक आदेशों की अवहेलना और सरकारी काम में बाधा जैसी धाराएं शामिल हैं।
शनिवार को भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचे, जिसके बाद पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया।
SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल
प्रदर्शन के पीछे चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल भी अहम हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में कुछ फैसलों को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों की जानकारी और सहमति से जुड़े सवाल शामिल थे। वहीं, चुनाव आयोग ने कहा है कि संस्था के भीतर चर्चा के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया है और उसके आदेश कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए गए हैं।