आजकल युवाओं के बीच एनर्जी ड्रिंक का चलन तेजी से बढ़ रहा है। पढ़ाई के दौरान नींद भगाने, जिम में एक्टिव रहने, लंबे समय तक काम करने या पार्टी में देर रात तक जागने के लिए कई युवा इनका सहारा लेते हैं। बाजार में उपलब्ध इन पेय पदार्थों को अक्सर तुरंत ऊर्जा और अलर्टनेस से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन सवाल यह है कि जो ऊर्जा कुछ समय के लिए महसूस होती है, क्या वह शरीर को वास्तव में ताकत देती है या सिर्फ थकान के संकेतों को कुछ देर के लिए दबाती है?
नींद पर असर
एनर्जी ड्रिंक का सबसे बड़ा असर नींद के पैटर्न पर पड़ सकता है। खासकर शाम या रात में कैफीन लेने से सोने में परेशानी, नींद का समय कम होना या नींद की गुणवत्ता प्रभावित होना संभव है। पर्याप्त नींद न मिलने पर अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी महसूस हो सकती है। ऐसे में व्यक्ति दोबारा एनर्जी ड्रिंक का सेवन कर सकता है और यह आदत का रूप ले सकती है।
दिल की धड़कन और बेचैनी पर भी ध्यान जरूरी
अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन कुछ लोगों में बेचैनी, घबराहट, हाथ कांपना या दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। इसका असर हर व्यक्ति में अलग हो सकता है और यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि दिनभर में कुल कितना कैफीन लिया जा रहा है। यदि किसी व्यक्ति को एनर्जी ड्रिंक पीने के बाद असामान्य धड़कन, सीने में दर्द, तेज घबराहट या अन्य गंभीर लक्षण महसूस हों, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
चीनी की मात्रा भी बन सकती है चिंता
कई एनर्जी ड्रिंक्स में काफी मात्रा में अतिरिक्त चीनी होती है। नियमित रूप से अधिक मीठे पेय लेने से कैलोरी की मात्रा बढ़ सकती है और लंबे समय में वजन तथा दांतों की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए सिर्फ कैफीन ही नहीं, बल्कि लेबल पर दी गई चीनी और कुल कैलोरी की जानकारी देखना भी जरूरी है।
क्या युवाओं को रोजाना पीना चाहिए?
एनर्जी ड्रिंक को रोज की थकान दूर करने का स्थायी समाधान मानना सही नहीं है। खासकर किशोरों के लिए कैफीनयुक्त एनर्जी ड्रिंक्स को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। शरीर को वास्तविक ऊर्जा और रिकवरी के लिए पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन, पानी और नियमित शारीरिक गतिविधि ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।