हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखने के लिए कैल्शियम बेहद जरूरी मिनरल है। यही वजह है कि बचपन से ही हमें रोज दूध पीने की सलाह दी जाती है। हालांकि, हर किसी को दूध पसंद हो यह जरूरी नहीं है। कुछ लोगों को लैक्टोज इनटॉलरेंस की समस्या भी होती है। ऐसे में कैल्शियम के लिए सिर्फ दूध पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। भारतीय रसोई में कई ऐसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ मौजूद हैं, जो कैल्शियम से भरपूर होते हैं और इन्हें रोजमर्रा की डाइट में आसानी से शामिल किया जा सकता है। आइए जानते हैं ऐसी 6 देसी चीजों के बारे में।
तिल
तिल कैल्शियम का एक बेहतरीन स्रोत माना जाता है। 100 ग्राम बिना छिले तिल में करीब 975 मिलीग्राम कैल्शियम पाया जाता है। इसमें मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और हेल्दी फैट जैसे पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं। तिल को लड्डू, चटनी, सब्जी या सलाद में डालकर डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि, इसकी मात्रा संतुलित रखना जरूरी है क्योंकि तिल कैलोरी से भी भरपूर होता है।रागी
रागी यानी फिंगर मिलेट को कैल्शियम से भरपूर अनाज माना जाता है। 100 ग्राम रागी में करीब 344 मिलीग्राम कैल्शियम हो सकता है। यह बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए डाइट में शामिल किया जा सकता है। रागी से दलिया, रोटी, चीला, डोसा और कई तरह के स्नैक्स बनाए जा सकते हैं। इसमें फाइबर भी पाया जाता है, जो इसे एक पौष्टिक विकल्प बनाता है।
राजगीरा
राजगीरा भी कैल्शियम से भरपूर पारंपरिक अनाज है। 100 ग्राम राजगीरा में लगभग 215 मिलीग्राम कैल्शियम पाया जा सकता है। यह ग्लूटेन-फ्री विकल्प है और इसमें प्रोटीन, फाइबर और अन्य पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं। व्रत के दौरान इसका इस्तेमाल आमतौर पर आटे या लड्डू के रूप में किया जाता है। सामान्य दिनों में भी राजगीरे की रोटी या खिचड़ी डाइट में शामिल की जा सकती है।
सोया और सोयाबीन
सोयाबीन और इससे बने खाद्य पदार्थ जैसे टोफू भी कैल्शियम पाने का अच्छा विकल्प हो सकते हैं। खासतौर पर जो लोग दूध या डेयरी उत्पादों का सेवन नहीं करते, उनके लिए सोया आधारित चीजें उपयोगी हो सकती हैं। टोफू को सब्जी, सलाद या स्टर-फ्राई के रूप में खाया जा सकता है। हालांकि, कैल्शियम की मात्रा उत्पाद और उसकी प्रोसेसिंग के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
चना
चना भारतीय घरों में आसानी से मिलने वाला पौष्टिक खाद्य पदार्थ है। इसमें कैल्शियम के साथ प्रोटीन, फाइबर, आयरन और कई अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसे भिगोकर, उबालकर या चाट के रूप में खाया जा सकता है। नियमित डाइट में चने को शामिल करने से भोजन की पोषण गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
हरी पत्तेदार सब्जियां
पालक, सरसों का साग, बथुआ और चौलाई जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों में भी कैल्शियम पाया जाता है। इनमें विटामिन और अन्य माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भी होते हैं। पालक, सरसों का साग, बथुआ और चौलाई जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां भी कैल्शियम समेत कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हैं। इनमें विटामिन K, फोलेट, आयरन, मैग्नीशियम और फाइबर भी पाया जाता है, जो ओवरऑल हेल्थ के लिए फायदेमंद हैं। इन सब्जियों को नियमित डाइट में शामिल करने से भोजन की पोषण गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है।