हरतालिका तीज की विशेष पूजा

हरतालिका तीज पर शाम को ऐसे करें पार्थिव शिवलिंग का पूजन, जानें प्रदोष काल की खास महिमा

हरतालिका तीज पर महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं। इस दिन पार्थिव शिवलिंग की स्थापना और पूजा की जाती है।

By : सोनिया रायकवार
हरतालिका तीज पर शाम को ऐसे करें पार्थिव शिवलिंग का पूजन, जानें प्रदोष काल की खास महिमा

 

हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता के अनुसार महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं। पूरे दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने के बाद शाम के समय प्रदोष काल में विशेष पूजा की जाती है। हरतालिका तीज पर पार्थिव शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की पूजा करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में श्रद्धा और विधि-विधान से की गई शिव-पार्वती की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

पार्थिव शिवलिंग पूजा का क्या है महत्व?

हरतालिका तीज के दिन शुद्ध मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करने की परंपरा है। महिलाएं प्रदोष काल में विधि-विधान के साथ पार्थिव शिवलिंग की स्थापना कर भगवान शिव का अभिषेक करती हैं। पूजा के दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, अक्षत, चंदन और रोली अर्पित की जाती है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती के मंत्रों का जाप करते हुए आरती की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि पार्थिव शिवलिंग की पूजा श्रद्धा, संयम और भक्ति का प्रतीक है। हालांकि, पूजा की विधि अलग-अलग परंपराओं में कुछ अलग हो सकती है।

प्रदोष काल में क्यों की जाती है पूजा?

संध्या के समय दिन और रात के मिलन की अवधि को प्रदोष काल कहा जाता है। सनातन परंपरा में यह समय भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। हरतालिका तीज पर प्रदोष काल में एकाग्रचित्त होकर भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करने और दीपक जलाकर आरती करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दौरान की गई पूजा से मन को शांति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

बेलपत्र और शमीपत्र करें अर्पित

पार्थिव शिवलिंग की पूजा के दौरान भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित किया जाता है। इसके साथ 7 शमीपत्र भी श्रद्धा से अर्पित करने की परंपरा बताई गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। पूजा के दौरान श्रद्धा और नियमों का पालन करते हुए बेलपत्र और शमीपत्र अर्पित करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य की कामना की जाती है।

माता पार्वती को अर्पित करें सुहाग की सामग्री

हरतालिका तीज की पूजा भगवान शिव के साथ माता पार्वती को समर्पित होती है। इस दिन माता पार्वती को लाल चुनरी और सुहाग की सामग्री अर्पित करने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार माता पार्वती की पूजा और उन्हें सुहाग की सामग्री अर्पित करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, मधुरता और स्थायित्व की कामना की जाती है।

घी का दीपक जलाकर करें आरती

प्रदोष काल में पार्थिव शिवलिंग के सामने घी का दीपक जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती की जा सकती है। इसके बाद अपनी मनोकामना के साथ भगवान शिव का ध्यान और मंत्र जाप करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दीपक जलाने और आरती करने से घर में सकारात्मकता का संचार होता है। हरतालिका तीज की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, संयम और भक्ति भाव माना जाता है।

 

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