लखनऊ, 25 सितंबर। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश में डॉ. बीआर आंबेडकर की प्रतिमा स्थलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए बड़ा कदम उठाया है। डॉ. बीआर आंबेडकर मूर्ति स्थल विकास योजना के तहत प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में स्थापित 4,030 प्रतिमा स्थलों का विकास कराया जाएगा। इसके लिए सरकार ने 403 करोड़ रुपये की धनराशि जिलाधिकारियों के निवर्तन पर आवंटित कर दी है।
हर विधानसभा क्षेत्र में 10 प्रतिमा स्थल
योजना के पहले चरण में प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में 10-10 प्रतिमा स्थलों का चयन किया गया है। इस तरह कुल 4,030 प्रतिमा स्थलों का संरक्षण और सौंदर्यीकरण किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इन स्थलों को सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक स्वरूप देना है। शासन के अनुसार कई प्रतिमा स्थल छत, बाउंड्री वॉल और अन्य जरूरी सुविधाओं से वंचित हैं। ऐसे स्थलों को मौसम, अतिक्रमण और उपेक्षा से बचाने के लिए जरूरी निर्माण कार्य कराए जाएंगे।
403 करोड़ रुपये का हुआ आवंटन
चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए योजना के तहत 40,300 लाख रुपये यानी 403 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 22 सितंबर 2026 को निदेशालय स्तर से प्रदेश की 403 विधानसभाओं में स्थित 4,030 प्रतिमा स्थलों के विकास के लिए यह राशि जिलाधिकारियों के निवर्तन पर आवंटित की गई। इस हिसाब से प्रत्येक प्रतिमा स्थल के लिए औसतन 10 लाख रुपये उपलब्ध होंगे। हालांकि शासनादेश के मुताबिक किसी एक मूर्ति स्थल के विकास की अधिकतम लागत 40 लाख रुपये निर्धारित की गई है। वास्तविक खर्च स्थल की जरूरत और तैयार किए गए आगणन के आधार पर तय होगा।
छत, बाउंड्री और प्रकाश व्यवस्था पर जोर
प्रतिमा स्थलों पर रैलिंगयुक्त स्टील की सीढ़ियां, प्रतिमा के लिए छत, बाउंड्री, फिनिशिंग, हरियाली और प्रकाश व्यवस्था जैसे काम कराए जाएंगे। इसके अलावा स्थल को साफ-सुथरा और व्यवस्थित बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। प्रतिमा के नाम और उसके इतिहास की संक्षिप्त जानकारी देने के लिए 3×2.5 फीट का सूचना बोर्ड भी लगाया जाएगा। इस बोर्ड को जिलाधिकारी की ओर से अनुमोदित किया जाएगा।
क्षतिग्रस्त प्रतिमाओं के स्थान पर लग सकेगी नई प्रतिमा
योजना में पुरानी या क्षतिग्रस्त प्रतिमाओं को बदलने का भी प्रावधान रखा गया है। जरूरत पड़ने पर सार्वजनिक स्थल पर स्थापित ऐसी प्रतिमाओं के स्थान पर संगमरमर की नई प्रतिमा स्थापित की जा सकेगी। इससे योजना केवल स्थल के सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रतिमाओं के संरक्षण और आवश्यक होने पर उनके प्रतिस्थापन को भी इसमें शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में स्टीयरिंग कमेटी
योजना की निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी गठित की गई है। इसमें न्याय, संस्कृति, पर्यटन, वित्त, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, नगर विकास और समाज कल्याण सहित संबंधित विभागों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में अंतरविभागीय समन्वय समिति भी बनाई गई है।
स्थानीय स्तर पर कराया जाएगा विकास कार्य
योजना के तहत प्रतिमा स्थल के विकास के लिए खंड विकास अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी या जिलाधिकारी के पास आवेदन किया जा सकता है। स्थल का निरीक्षण कराने के बाद जिलाधिकारी द्वारा चिन्हित कार्यदायी संस्था से विकास कार्य का आगणन तैयार कराया जाएगा। निर्माण और सौंदर्यीकरण के काम निर्धारित इंजीनियरिंग और सुरक्षा मानकों के अनुसार किए जाएंगे। इन कार्यों को संबंधित विभाग, नगरीय निकाय, जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत या ग्राम पंचायत के माध्यम से कराया जा सकेगा।
31 दिसंबर 2026 तक काम पूरा करने का लक्ष्य
सरकार ने योजना के लिए समयसीमा भी तय की है। स्थल चयन, निरीक्षण, आगणन और निविदा प्रक्रिया के बाद निर्माण एवं सौंदर्यीकरण का काम आगे बढ़ाया जाएगा। योजना के तहत सभी निर्धारित परियोजनाओं को 31 दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सितंबर में धनराशि आवंटित होने के बाद अब जिला स्तर पर कार्यदायी संस्थाओं के चयन और परियोजनाओं के प्रशासनिक एवं वित्तीय अनुमोदन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
सामाजिक और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने पर जोर
शासन के अनुसार योजना का उद्देश्य सिर्फ प्रतिमा स्थलों का निर्माण और सौंदर्यीकरण करना नहीं है। महान समाज सुधारकों और राष्ट्रीय विभूतियों की प्रतिमाओं को सामाजिक और सांस्कृतिक स्मृति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के 403 विधानसभा क्षेत्रों में 4,030 आंबेडकर प्रतिमा स्थलों को सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित स्वरूप देने की योजना बनाई गई है। सरकार के अनुसार इससे इन स्थलों के संरक्षण के साथ नई पीढ़ी में महान विभूतियों के योगदान और उनके प्रति सम्मान की भावना को भी बढ़ावा मिलेगा।