उत्तर प्रदेश में चकबंदी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और न्यायपूर्ण बनाने के लिए योगी सरकार ने अधिकारियों को नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि चकबंदी मामलों में किसानों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।
चकबंदी खत्म होते ही अधिकार खत्म
चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद के निर्देश के मुताबिक, उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम-1953 की धारा 6(1) के तहत किसी गांव में चकबंदी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद चकबंदी अधिकारियों का क्षेत्राधिकार भी समाप्त हो जाएगा। धारा 6(2) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विचाराधीन मामले स्वतः समाप्त माने जाएंगे और गांव के सभी अभिलेख तत्काल तहसील प्रशासन को सौंपे जाएंगे।
रिकॉर्ड समय पर सौंपने के निर्देश
अभिलेखों में किए गए अंतिम संशोधनों के आदेशों की प्रमाणित सूचियां तैयार कर अभिलेखागार, चकबंदी कार्यालय और तहसील में भेजने के निर्देश दिए गए हैं। किसी गांव से संबंधित आदेश को रद्द कराने का मामला सामने आने पर उसे तत्काल सक्षम स्तर पर भेजने को कहा गया है।
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
निर्देशों का पालन नहीं करने वाले चकबंदी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। शासन की ओर से अधिकारियों को प्रक्रिया पूरी होने के बाद अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने की हिदायत दी गई है।
धारा 52(1) के बाद नई आपत्तियों पर रोक
चकबंदी आयुक्त के निर्देशों में धारा 52(1) की विज्ञप्ति जारी होने के बाद नई आपत्तियां, संदर्भ या पुनर्स्थापन प्रार्थना पत्र स्वीकार नहीं करने की बात कही गई है। इसके लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के एक फैसले का भी हवाला दिया गया है।
नियम तोड़ने पर दंडात्मक कार्रवाई
निर्देशों में कहा गया है कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद मामलों को दोबारा शुरू करना क्षेत्राधिकार से बाहर हो सकता है। ऐसे मामलों में आदेश जारी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का उद्देश्य चकबंदी प्रक्रिया में स्पष्टता बनाए रखने के साथ किसानों को अनावश्यक कानूनी और प्रशासनिक परेशानी से बचाना है।