लखनऊ, 25 सितंबर। उत्तर प्रदेश के शहरों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए अमृत 2.0 योजना के तहत बड़े स्तर पर विकास कार्य किए जा रहे हैं। योजना में पेयजल, सीवरेज, जल संरक्षण और हरित क्षेत्रों के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश में करीब 29,716 करोड़ रुपये की 637 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
637 परियोजनाओं को मिली मंजूरी
भारत सरकार की अटल नवीकरण एवं शहरी परिवर्तन मिशन यानी अमृत 2.0 योजना वर्ष 2021 से 2026 तक संचालित है। उत्तर प्रदेश के 762 नगरीय निकायों और 60 अमृत शहरों को इस योजना में शामिल किया गया है। प्रदेश में अमृत 2.0 के तहत कुल 637 परियोजनाओं के लिए 29,716.29 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इनमें से 114 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 453 परियोजनाओं पर काम जारी है। अब तक 612 परियोजनाओं को वित्तीय स्वीकृति और 567 परियोजनाओं की निविदाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं।
पेयजल और सीवरेज पर बड़ा फोकस
अमृत 2.0 के तहत शहरों में पेयजल और सीवरेज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ी राशि खर्च की जा रही है। योजना में 18,829 करोड़ रुपये की 437 पेयजल परियोजनाएं और 10,124 करोड़ रुपये की 41 सीवरेज परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के जरिए शहरों में पेयजल आपूर्ति का विस्तार, सीवर नेटवर्क को बेहतर करना और स्वच्छता से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरोवरों के पुनर्जीवन पर भी जोर
शहरी क्षेत्रों में जल संरक्षण और पर्यावरण सुधार के लिए सरोवरों के पुनर्जीवन की परियोजनाएं भी शामिल की गई हैं। इसके तहत 403.45 करोड़ रुपये की लागत से 190 सरोवर पुनर्जीवन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। एक एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले सरोवरों के पुनर्जीवन के साथ वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण को भी योजना में शामिल किया गया है।
पार्क और हरित क्षेत्रों का होगा विकास
शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए भी अमृत 2.0 के तहत काम किया जा रहा है। इसके लिए 89.76 करोड़ रुपये की 1,777 हरित भूमि और पार्क परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के साथ लोगों के लिए बेहतर सार्वजनिक स्थान विकसित करना है।
समय पर काम पूरा करने पर जोर
विभाग की ओर से स्वीकृत परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा कराने और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। पेयजल और सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ जल संरक्षण और पर्यावरण सुधार को भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
जल सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगी मजबूती
अमृत 2.0 के तहत चल रही परियोजनाओं से प्रदेश के शहरों में पेयजल, सीवरेज और जल संरक्षण से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार का लक्ष्य है। सरोवरों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और पार्कों के विकास से शहरी पर्यावरण को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं के पूरा होने से नगरीय निकायों में नागरिक सुविधाओं के विस्तार और शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।