हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनकी किसी जनसभा में अगर बोलते समय जुबान फिसल जाती है, तो भाजपा इसे मुद्दा बनाकर चुटकुला तैयार कर देती है। उन्होंने कहा कि हालांकि प्रदेश की जनता सरकार के काम और वास्तविकता से अच्छी तरह वाकिफ है।
मुख्यमंत्री सिरमौर जिले के पच्छाद उपमंडल मुख्यालय सराहां में आयोजित राज्य स्तरीय श्री वामन द्वादशी मेले के समापन समारोह में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। करीब 22 मिनट के अपने भाषण में उन्होंने सरकार की उपलब्धियां गिनाने के साथ भाजपा पर कई राजनीतिक आरोप लगाए।
BBN जमीन मामले का उठाया मुद्दा
सुक्खू ने पच्छाद की भाजपा विधायक का जिक्र करते हुए कहा कि उनसे पूछा जाना चाहिए कि भाजपा के शासन में प्रदेश के हितों के साथ किस तरह समझौता किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीबीएन में 5,000 बीघा जमीन बिना पंजीकरण के एक करोड़ रुपये में बेच दी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्ता संभालने के बाद उन्हें पता चला कि पिछली सरकार के दौरान 10 रुपये की चीज 100 रुपये में खरीदी जा रही थी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार व्यवस्था परिवर्तन के तहत कड़े फैसले ले रही है।
सुक्खू ने दावा किया कि सरकार की कोशिशों से हिमाचल प्रदेश वर्ष 2027 तक आत्मनिर्भर राज्य बनेगा और 2032 तक देश के सबसे समृद्ध राज्यों की दिशा में आगे बढ़ेगा।
किशाऊ बांध से 1,500 करोड़ तक आय का दावा
मुख्यमंत्री ने किशाऊ बांध परियोजना को लेकर कहा कि उनकी सरकार ने केंद्र के साथ बातचीत कर परियोजना के वित्तीय बोझ को हिमाचल प्रदेश पर पड़ने से रोका है। उनके मुताबिक, पहले हुए समझौते में परियोजना निर्माण का खर्च हिमाचल सरकार को भी उठाना था।
सुक्खू ने कहा कि सरकार ने केंद्र के साथ बातचीत के बाद ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की, जिसके तहत किशाऊ बांध का खर्च केंद्र सरकार और अन्य संबंधित राज्य उठाएंगे। उन्होंने दावा किया कि परियोजना से भविष्य में हिमाचल को 1,200 से 1,500 करोड़ रुपये की आय हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली, गुरुग्राम और एनसीआर में आने वाले वर्षों में पानी की मांग बढ़ेगी और ऐसे में हिमाचल के जल संसाधनों का महत्व और बढ़ेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश की प्राकृतिक संपदा पर बड़ी परियोजना बन रही है, तो उसका पूरा खर्च हिमाचल क्यों उठाए।
गांवों में स्कूल, स्वास्थ्य और सड़क पर जोर
सुक्खू ने कहा कि हिमाचल की करीब 90 फीसदी आबादी अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। ऐसे में सरकार को गांवों में बेहतर स्कूल, स्वास्थ्य संस्थान और सड़कें उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में निजी स्कूलों की तर्ज पर सीबीएसई स्कूल शुरू किए जा रहे हैं। पच्छाद के सराहां में भी सीबीएसई स्कूल शुरू हो चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ग्रामीण किसानों की आय बढ़ाने के लिए दूध का समर्थन मूल्य तय किया है। उनके मुताबिक, इसके बाद गांव के किसान की मासिक आय 25 से 30 हजार रुपये तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि सिरमौर की प्रमुख नगदी फसल लहसुन के लिए भी आने वाले समय में समर्थन मूल्य तय किया जाएगा। अदरक के लिए पिछले वर्ष समर्थन मूल्य घोषित किया गया था, जिसे आगे बढ़ाने की बात भी उन्होंने कही।
OPS और कर्मचारियों को लेकर भी बड़ा दावा
सुक्खू ने कहा कि पूर्व सरकार द्वारा छोड़े गए कर्ज को चुकाने के लिए मौजूदा सरकार को कर्ज लेना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने कर्मचारियों को ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) का लाभ दिया है और जो कर्मचारी इससे वंचित रह गए हैं, उन्हें भी जल्द इसके दायरे में लाया जाएगा।
उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि भाजपा सत्ता में आती है तो OPS बंद कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार अपने हितों के लिए सुप्रीम कोर्ट में भी लड़ाई लड़ रही है और आने वाले समय में अदालत के फैसले से हिमाचल सरकार को 500 करोड़ रुपये और मिल सकते हैं।
‘चुनौतियां अंदर भी हैं और बाहर भी’
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं, लेकिन सरकार उनका सामना कर रही है। उन्होंने बताया कि एसजेवीएन का वार्षिक टर्नओवर 67,000 करोड़ रुपये है, जबकि हिमाचल प्रदेश सरकार का वार्षिक बजट करीब 54,000 करोड़ रुपये है।

उन्होंने कर्मचारियों को जल्द डीए की किस्त देने की बात भी कही। सुक्खू ने कहा कि पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल को 1955 से रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) मिलती रही, जिसे अब केंद्र सरकार ने बंद कर दिया है। इसके बावजूद सरकार कर्मचारियों को वेतन और पेंशन समय पर दे रही है।
मुख्यमंत्री ने अंत में विधवा महिलाओं के बच्चों के लिए प्रस्तावित योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि योजना के तहत बेटे की पढ़ाई के लिए 1,000 रुपये और बेटी की पढ़ाई के लिए 1,500 रुपये प्रतिमाह की सहायता देने का प्रावधान किया जा रहा है।