विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026 और टूलकिट एवं ऋण वितरण कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य कहा जाता था, जबकि प्रदेश के पास बड़ी आबादी, उपजाऊ भूमि, जल संसाधन और युवा शक्ति जैसे पर्याप्त संसाधन मौजूद थे।
हमने अपने कारीगरों, उद्यमियों और हस्तशिल्पियों को सम्मान दिया, जिसका परिणाम है कि आज यूपी भारत की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर आगे बढ़ा है।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) September 17, 2026
भगवान विश्वकर्मा की जयंती के अवसर पर आज लखनऊ में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 के अंतर्गत 'विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला… pic.twitter.com/XjwYkrNS9c
बीमारू मानसिकता पर हमला
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बीमारू उत्तर प्रदेश नहीं था, बल्कि प्रदेश को चलाने वाले राजनेताओं की मानसिकता बीमारू थी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के समय पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्पियों को उचित सम्मान और अवसर नहीं मिला।
सपा पर निशाना
मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जिन्हें सैफई महोत्सव और बर्मिंघम की बग्घी से फुर्सत नहीं थी, वे कारीगरों और आत्मनिर्भरता के बारे में क्या सोचते। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने कारीगरों के लिए योजनाएं लागू कीं तो कुछ लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। वर्तमान सरकार ने कारीगरों को प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट और बैंक ऋण से जोड़ने का काम किया है।
कारीगर बने उद्यमी
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि हमारा कारीगर और हस्तशिल्पी श्रमिक न बने, बल्कि उद्यमी बने। उन्होंने कहा कि कारीगर रोज काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता है, इसलिए प्रशिक्षण के दौरान उसकी आय प्रभावित न हो, इसकी व्यवस्था की गई है। योजना के तहत 10 दिन का निशुल्क प्रशिक्षण, प्रशिक्षण के दौरान पांच हजार रुपये का मानदेय और इसके बाद 15 हजार रुपये तक की टूलकिट उपलब्ध कराई जाती है।
10 लाख तक का ऋण
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएम युवा उद्यमी योजना में पांच लाख रुपये तक ब्याज और गारंटी मुक्त ऋण की सुविधा है। कारीगरों के लिए इसकी सीमा बढ़ाकर 10 लाख रुपये तक की गई है। इसमें 10 से 15 प्रतिशत तक मार्जिन मनी की व्यवस्था भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पूंजी की कमी किसी कारीगर के उद्यमी बनने की राह में बाधा न बने।
25 ट्रेड में प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री ने बताया कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के पहले चरण में 16 ट्रेड शामिल थे। अब योजना में नए पारंपरिक और आधुनिक ट्रेड जोड़े गए हैं। इनमें मूर्तिकार, दुधिया, माला बनाने वाले माली, भड़भूजा और मछुआरा के साथ मोबाइल रिपेयर, ऑटोमोबाइल रिपेयर, इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल उपकरणों की मरम्मत, प्लंबरिंग, कंप्यूटर रिपेयर, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी और ब्यूटी पार्लर जैसे ट्रेड शामिल हैं। अब कुल 25 ट्रेड में प्रशिक्षण और सहयोग दिया जाएगा।
यूपी की अर्थव्यवस्था का दावा
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश देश के बॉटम फाइव राज्यों में आता था। आज देश की दो-तीन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की चर्चा में उत्तर प्रदेश भी शामिल है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां स्थापित हैं और इनमें करीब 3.25 करोड़ लोगों को रोजगार मिल रहा है।
ट्रेड शो में बड़े ऑर्डर की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने बताया कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर में यूपी ट्रेड शो आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रदेश के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। ट्रेड शो में 2,500 से अधिक प्रदर्शक और 650 से अधिक विदेशी खरीदार शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि आयोजन से 12 से 15 हजार करोड़ रुपये तक के कारोबार और ऑर्डर मिल सकते हैं।
छह लाख कारीगरों को लाभ
एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और ओडीओपी के माध्यम से छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों और कारीगरों को लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि प्लेज योजना के तहत 14 जिलों में 205.8 एकड़ से अधिक भूमि प्लेज पार्कों के लिए स्वीकृत की गई है। महिला उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज उपादान सहायता की व्यवस्था भी की गई है।
टूलकिट और ऋण वितरण
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न स्टॉल का निरीक्षण किया और कारीगरों के उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने भगवान विश्वकर्मा के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों के कारीगरों को टूलकिट और ऋण के चेक भी वितरित किए। इनमें हलवाई, कुम्हार, दर्जी, नाई, मोची, लोहार, सुनार, बढ़ई, राजमिस्त्री और धोबी सहित कई पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लाभार्थी शामिल रहे।
कौशल विकास पर एमओयू
कार्यक्रम में कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए विभिन्न संस्थानों के साथ एमओयू का आदान-प्रदान भी किया गया। इसमें मीडिया एंड एंटरटेनमेंट स्किल काउंसिल, इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया, एनएसडीसी, हैंडीक्राफ्ट एंड कार्पेट स्किल काउंसिल और टाटा पावर सहित संस्थानों की भागीदारी रही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, बाजार और वित्तीय सहायता से जोड़कर कारीगरों को आत्मनिर्भर और उद्यमी बनाना है।