लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में इस समय करीब 16.5 लाख सरकारी कर्मचारी काम कर रहे हैं। इनमें से करीब 9.5 लाख कर्मचारियों की भर्ती उनकी सरकार के कार्यकाल में हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार की सोच रुकने की नहीं, बल्कि समय से आगे बढ़कर काम करने की है। सीएम योगी रविवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के छठे स्थापना दिवस कार्यक्रम में पहुंचे थे। इससे पहले उन्होंने संस्थान में ऑर्गन ट्रांसप्लांट यूनिट और इमरजेंसी के 40 बेड वाले नए वार्ड का लोकार्पण किया।
9.5 लाख भर्तियों का दावा
स्थापना दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में करीब 16.5 लाख सरकारी कर्मचारी हैं, जिनमें साढ़े नौ लाख कर्मचारियों की भर्ती सरकार ने की है। उन्होंने कहा कि युवा वर्कफोर्स में काम करने की गति है और जब गति होती है तो प्रगति को रोकना मुश्किल होता है।
योगी ने कहा कि संस्थान की ओर से संसाधनों को लेकर जो मांग शासन के सामने रखी गई, उसे पूरा करने में सरकार ने कोई कमी नहीं छोड़ी। अब संस्थान की जिम्मेदारी है कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करे। मुख्यमंत्री ने लोहिया संस्थान को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तौर पर विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्लिनिकल, एकेडमिक और रिसर्च एक्सीलेंस के लिए संस्थान को आने वाले समय में और बेहतर तैयारी करनी होगी।
ट्रांसप्लांट यूनिट शुरू
मुख्यमंत्री ने लोहिया संस्थान में ऑर्गन ट्रांसप्लांट यूनिट की शुरुआत की। संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह के मुताबिक, नई यूनिट के जरिए मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा मिल सकेगी। संस्थान में बोनमैरो और लिवर ट्रांसप्लांट की दिशा में भी तैयारी चल रही है। सीएम योगी ने इमरजेंसी के 40 बेड वाले नए वार्ड का भी लोकार्पण किया। उन्होंने बताया कि संस्थान में 350 बेड का ट्रॉमा सेंटर भी बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र बनकर उभरा है। छह साल की यात्रा में संस्थान ने इलाज के साथ शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में भी काम किया है।
कोविड से मिली सीख
योगी ने कोविड काल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय आईआईटी के जरिए तैयार किए गए डेटा और डायग्राम से आने वाली स्थिति का आकलन किया जाता था। इसी आधार पर केंद्र सरकार के सामने भी स्थिति की जानकारी रखी जाती थी। उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने फील्ड में रहकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग और दस्तक अभियान के जरिए लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी संस्थान को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने के लिए लीडरशिप, लर्निंग और डिस्कवरी का साथ चलना जरूरी है। लोहिया संस्थान ने इन क्षेत्रों में काम किया है और आगे भी इसे और मजबूत करने की जरूरत है।
मेडिकल हब बनाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी सरकार आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर मेडिकल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित कर रही है। एसजीपीजीआई में भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर काम किया जा रहा है। इसके अलावा मेडिकल डिवाइस और फार्मा सेक्टर में भी नए प्रोजेक्ट शुरू किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूपी देश का सबसे बड़ा फार्मा बाजार है, लेकिन पहले यहां दवाओं के उत्पादन और रिसर्च के क्षेत्र में अपेक्षित काम नहीं हुआ। अब इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। योगी ने कहा कि चिकित्सा संस्थानों को आईआईटी और दूसरे तकनीकी संस्थानों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। सरकार इसके लिए हर संभव मदद करेगी। उन्होंने कहा कि बीमारी का पैटर्न बदल रहा है, इसलिए रिसर्च और उपचार की दिशा भी उसी हिसाब से बदलनी होगी।