देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विकास का फायदा समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। विकास सिर्फ बड़ी परियोजनाओं और शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि जरूरतमंद और दूरदराज के लोगों को भी उसका लाभ मिले, यह सरकार की जिम्मेदारी है। हल्द्वानी में आयोजित ‘उत्तराखंड : आशाएं व चुनौतियां’ विषयक जागरण विमर्श के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वर्ष 2027 में जब सरकार जनता के बीच जाएगी, तो केवल दावों के साथ नहीं बल्कि पिछले पांच वर्षों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड लेकर जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने जनसेवा, सुशासन और विकास को प्राथमिकता देते हुए काम किया है।
जनता करेगी अंतिम फैसला
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के कामकाज का अंतिम मूल्यांकन जनता को करना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता ने हमेशा सरकार को अपना आशीर्वाद दिया है और उन्हें उम्मीद है कि जनसेवा और विकास के संकल्प के साथ आगे भी काम जारी रहेगा। धामी ने कहा कि उत्तराखंड के विकास के साथ राज्य की संस्कृति, पहचान और विरासत को भी मजबूत बनाए रखना जरूरी है। विकास की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें प्रदेश की पारंपरिक पहचान और पर्यावरण दोनों का ध्यान रखा जाए।
कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड में सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के साथ पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी काम किया जा रहा है। उन्होंने समान नागरिक संहिता और सख्त भू-कानून को लेकर भी सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है। सरकार का प्रयास है कि योजनाओं और सुविधाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुंचे।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन चुनौती
धामी ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती है। सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जागरण विमर्श जैसे मंचों पर होने वाली चर्चा से राज्य की मौजूदा चुनौतियों के समाधान के रास्ते निकलेंगे।
मीडिया को बताया लोकतंत्र का महत्वपूर्ण सेतु
मुख्यमंत्री ने मीडिया की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आज मीडिया की जिम्मेदारी पहले से अधिक बढ़ गई है। मीडिया सिर्फ समाचार पहुंचाने का माध्यम नहीं है, बल्कि जनता और शासन-व्यवस्था के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि किसी गांव में सड़क, पेयजल या स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी समस्या को जब मीडिया सामने लाता है, तो उसके समाधान की प्रक्रिया शुरू होने में मदद मिलती है।
तथ्यपरक पत्रकारिता की जरूरत
धामी ने कहा कि इंटरनेट मीडिया के दौर में सूचनाएं तेजी से लोगों तक पहुंचती हैं। ऐसे समय में तथ्यों पर आधारित और विश्वसनीय पत्रकारिता की जरूरत और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक आलोचना और तथ्यपरक सवाल लोकतंत्र का हिस्सा हैं और इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है। इससे पहले दैनिक जागरण समूह के निदेशक संदीप गुप्त ने कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जागरण विमर्श का उद्देश्य ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करना है, जिनसे जुड़े समाधान के रास्ते तलाशे जा सकें। उन्होंने विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी राज्य के लिए महत्वपूर्ण विषय बताया।